कब खेलेंगे विश्व कप?

राजेंद्र सजवान

भारतीय फुटबाल के सर्वकालीन श्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल पीके बनर्जी जीवन की लड़ाई लड़ रहे हैं| ताउम्र भारत को विश्व कप खेलते देखने का उनका सपना पूरा होता नज़र नहीं आता| कुछ इसी प्रकार की सोच महान कोच रहीम, मेवा लाल, जरनैल सिंह, मगन सिंह, इंदर सिंह और सैकड़ों पूर्व चैम्पियनों ने देखा था| पिछले तीस-चालीस सालों से भारतीय फुटबाल ने भले ही शेख़चिल्ली जैसे सपने देखना शुरू कर दिया है लेकिन साल दर साल खेल का स्तर गिरता जा रहा है|

ख़ासकर, सतर के दशक के बाद से, जब से हमारी फुटबाल ने विदेशी कोचों का दामन थामा हैखेल लगातार बिगड़ रहा है| हाल के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो 2022 के विश्व कप में भारत नहीं खेल पाएगा क्योंकि क्वालीफायर में हमारी टीम कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई| एशियन चैंपियनशिप में कतर, ओमान, बांग्ला देश और अफ़ग़ानिस्तान जैसी टीमों के बीच खेल कर अपनी छवि गिराने वाली टीम से भला उम्मीद भी क्या की जा सकती है|

हालाँकि अभी तीन मैच खेले जाने बाकी हैं लेकिन जो टीम बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से ड्रॉ खेले उसके बारे में ज़्यादा ज्ञान बघारने की ज़रूरत नहीं है| कोच इगोर स्टिमक के रहते भारत ने पिछले नौ महीनों में सबसे अच्छा प्रदर्शन कतर से उसी के घर पर बराबर खेल कर किया है| बाकी सब वैसा ही चल रहा है जैसे तीस चालीस सालों में चलता आया है| इतिहास गवाह है कि भारत को खैरात में एक बार विश्व कप खेलने का मौका मिला था पर फ़ीफ़ा ने नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं दी|

बाद के सालों में दो बार ओलंपिक में दमदार खेल और दो अवसरों पर एशियाड खिताब जीतना यादगार कहे जा सकते हैं| बाद की कहानी किसी भी स्तर पर सुनाने और याद करने लायक नहीं है| कुछ साल पहले फुटबाल फ़ेडेरेशन के अध्यक्ष स्वर्गीय दास मुंशी ने बड़े बड़े दावे किए, विदेशी कोच बुलाए पर बात नहीं बन पाई| वर्तमान अध्यक्ष प्रफुल पटेल भी जब तब हुंकार भरते देखे जा सकते हैं| पटेल साहब ने भी बिना कुछ सोचे समझे दावे करना जारी रखा लेकिन आलम यह है कि फिसड्डी पड़ोसियों के बीच की चौधराहट भी जाती रही|

विदेशी कोच हर अधिकारी की पहली पसंद रहे| लेकिन अब तो कमाल ही हो गया है| आईएसएल शुरू होते ही बूढ़े विदेशी खिलाड़ी भी भारतीय फुटबाल में कुलाँचें भरने लगे हैं| राष्ट्रीय टीम का स्तर इतना गिर चुका है कि बेचारे हमारे श्रेष्ठ और बहुपयोगी खिलाड़ी सुनील क्षेत्री भी विश्व कप खेले बिना रिटायर हो जाएँगे| आम भारतीय फुटबाल प्रेमी पूछने लगा है कि आख़िर विदेशी का मोह किसलिए? अपने कोचों से परहेज किस काम आया?

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