खुशफहमी ले डूबी

राजेंद्र सजवान
आत्मविश्वास, दृढ़निश्चय और हार ना मानने की जिद्द किसी भी कामयाब खिलाड़ी या टीम के मजबूत पहलू हो सकते हैं लेकिन महत्वपूर्ण अवसरों पर कुछ और भी चाहिए होता है जिसकी अधिकांश भारतीय खिलाड़ियों में कमी पाई गई है। मेजबान आस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेले गये टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के बाद एक पूर्व खिलाड़ी के इस बयान में दम नज़र आता है।

ऐसा नहीं है कि क्रिकेट या किसी भी खेल में भारत को एन मौके पर या फाइनल में हार का सामना करना पड़ा हो कुछ महीन पहले भारतीय पुरुषों को न्यज़ीलैंड के हाथों सेमीफाइनल में कुछ इसी तरह से हार मिली थी। महिला टीम का फाइनल में आस्ट्रेलिया के हाथों हारना कोई उलटफेर नहीं है, क्योंकि इसी टीम को भारतीय लड़कियों ने ग्रुप मुक़ाबले में परास्त किया था। तो फिर ख़िताबी मुक़ाबले में ऐसा क्या हो गया कि खिताब की प्रबल दावेदार टीम किसी नौसीखिया की तरह पस्त हो गई।

बेशक, कप्तान हरमनप्रीत औरकुछ अन्य खिलाड़ी फार्म में नहीं चल रही थीं किंतु सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक मुक़ाबले में पूरी टीम द्वारा हथियार डालना सोचनीय ज़रूर है। 2005 के पहले वर्ल्ड कप फाइनल में खेली पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा ने मुक़ाबले से पहले ही भारतीय लड़कियों को सावधान कर दिया था। अंजुम ने अपने छह वर्ल्ड कप खेलने के अनुभव के आधार पर भारतीय खिलाड़ियों को पहले ही चेता दिया था कि फाइनल मुक़ाबले हमेशा हटकर होते हैं और ज़रूरी नहीं कि आसान सफ़र तय करने वाली टीम ही खिताब जीत जाए।

अंजुम मानती है कि फाइनल का दबाव आसान नहीं होता और हर एक खिलाड़ी ऐसे दबाव को झेल नहीं पाता है। उसने 2017 के फाइनल में हारने वाली कुछ खिलाड़ियों का उल्लेख किया और कहा कि उन्हें ज़रूर पता होगा कि फाइनल में हारने का कष्ट कैसा होताहै। कुछ क्रिकेट जानकारों को यह भी लगता है कि भारतीय लड़कियों को अत्यधिक आत्म विश्वास ले डूबा। यह जानते हुए भी कि हरमनप्रीत, स्मृति मंधाना और कई अन्य लड़कियाँ फार्म में नहीं चल रही थीं फिर भी टीम को मुक़ाबले से पहले ही विजेताओं की तारह प्रस्तुत किया गया, जोकि सरा सर आत्मघाती था|

। 16 साल की शैफाली वर्मा पर अत्यधिक उम्मीदों का बोझ डालना ना सिर्फ़ ग़लत था अपितु एक बेहद प्रतिभावान खिलाड़ी को दबाव में डालने जैसा भी था
इसमें दो राय नहीं कि उसमें अभूतपूर्व प्रतिभा है पर उसकी उम्र को देखते हुए आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को नई रणनीति बनाने में शायद मुश्किल पेश नहीं आई होगी। भले ही भारत ने ग्रुप मुक़ाबले में आस्ट्रेलिया को हराया और तत्पश्चात सारे मैच भी जीते लेकिन शैफाली को घेरने और प्रतिद्वंद्वी का मनोबल तोड़ने में मेजबान को कामयाबी मिल गई|

कुछ आलोचकों की माने तो भारतीय टीम के खिलाड़ियों का ध्यान भंग करने में टीम प्रबंधन, मीडिया, उनके नाते-रिश्तेदारों और नेताओं ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। किस खिलाड़ी के परिवार से कौन जा रहा है, कौन मंत्री और नेता क्या कह रहा है और किस भारतीय खिलाड़ी का क्या मजबूत पक्ष है, जैसी खबरें जमकर उड़ाई गईं। यह जानते हुए भी कि आस्ट्रेलियाई दिमागी खेल खेलने और दिमाग़ से जीतने में माहिर होते हैं, भारतीय टीम ने ज़रा भी परवाह नहीं की। जब आँख खुली तो पता चला कि प्रधानमंत्री मोदी की कही बात सच हो गई| उन्होने भारतीय टीम को शुभ कामना देते हुए बेहतर खेलने वाली टीम की जीत की कामना की और आस्ट्रेलिया जीत गई।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.