कैसे खेलें बेरोजगार?


राजेंद्र सजवान
जब तक कोरोना का कहर थम नहीं जाता और खेल गतिविधियाँ फिर से शुरू नहीं हो जातीं, देश में खेल-खिलाड़ियों का हित चाहने वाले उनके बेहतर भविष्य के लिए योजनाएँ बना सकते हैं| मसलन खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, सुविधाओं और रोज़गार को लेकर खेल मंत्रालय और अन्य मंत्रालय किसी ठोस योजना पर काम कर सकते हैं| इसमें दो राय नहीं कि पिछले कुछ सालों में कुछ एक भारतीय खेलों ने प्रगति की है|

ऐसा इसलिए भी संभव हो पाया है क्योंकि अधिकाधिक बच्चे खेल रहे हैं और युवा खेलों में अपना करियर खोज रहे हैं| लेकिन लाखों राष्ट्रीय और हज़ारों अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में से कुछ एक सौ को ही नौकरी मिल पाती है या उनके जीवन यापन का जुगाड़ हो पता है| बाकी रोज़गार की तलाश में बूढ़े और बर्बाद हो जाते हैं| कुछ साल पहले तक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी सरकारी और अर्धसरकारी विभागों में नौकरी पा जाते थे|

अब ऐसा नहीं रहा| नतीजन बेरोज़गार खिलाड़ियों की कतारें लंबी होती जा रही हैं| आईपीएल के साथ कुछ अन्य खेलों ने भी अपनी लीग शुरू कीं और लगा जैसे खिलाड़ियों के अच्छे दिन आ रहे हैं| यह प्रयोग भी कारगर नहीं रहा, क्योंकि ज़्यादतर लीग सिर्फ़ दिखावा और धोखाधड़ी साबित हुईं| कुछ एक ने तो अपनी दुकाने बंद कर दी हैं| पता चला है कि लीग आयोजनों में सिर्फ़ उन्हीं खिलाड़ियों को आर्थिक लाभ मिला जो पहले से ही सरकार और राज्य सरकारों से लाखों-करोड़ों पा रहे थे|

यह भी सच है कि जो उँची पहुँच वाले खिलाड़ी हैं उन्हें अनपढ़ या कम पढ़े लिखे होने और जाली सर्टिफिकेट से सीधे अफ़सर भी बनाया जाता है| लेकिन बाकी खिलाड़ी कहाँ जाएँ? खिलाड़ियों के भविष्य की चिंता कौन करेगा? एक तरफ़ तो सरकार खेलने का नारा दे रही है तो दूसरी तरफ आलम यह है कि खेलने के बाद खिलाड़ी खुद को छला गया महसूस करता है| बेहतर होगा, खेलों में आए विराम के चलते खेल मंत्रालय अन्य संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों, कॉरपोरेट जगत, तेल कंपनियों, बैंकों, बीमा कंपनियों, खेल संघों और अन्य से मिल बैठकर खिलाड़ियों के लिए नौकरियों की खोज करे|

इतना तय है कि खेलो इंडिया को भारतीय खेलों का प्रतीक बनाए जाने के बाद से खिलाड़ियों की संख्या और उनकी महत्वकांक्षा बढ़ेगी| ज़ाहिर है अधिकाधिक खिलाड़ी सुरक्षित भविष्य चाहेंगे| अतः सरकारों को आज और अभी से उनके भविष्य के बारे में सोचना होगा| वरना खेलो इंडिया एक असफल और निरर्थक प्रयास बन कर रह जाएगा| देश खेल महाशक्ति तब ही बनेगा जब उसके खिलाड़ियों का जीवन सुरक्षित होगा|

One thought on “कैसे खेलें बेरोजगार?

  1. सर जी प्रणाम,
    सर जी मैं भी एक सी बी एस सी के स्कूल में शारीरिक शिक्षक हू मैं आपके माध्यम से ये कहना चाहता हूँ कि सी बी एस सी के राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रमाण पत्र की कोई उपयोगिता नहीं दिखती तो मैं यह समझू की इस बोर्ड को खेल की जरूरत सिर्फ कागजों पर समझ आती है क्योंकि की बहुत से बच्चे हमारे स्कूल के जो यूनिवर्सिटी में लेकर ये प्रमाण पत्र गये उनको कोई वरीयता नहीं मिली जिससे हताश होकर अब बच्चे खेलना नहीं चाहते और सरकार खेल के लिए बड़ी योजना बना रही है और भारत की सबसे बड़ी शिक्षा संस्थान के प्रमाण पत्र की कोई औकात नही इसे अच्छे तो राज्य बोर्ड है ।
    आप कृपया करके ऐसा कुछ लिखे जिसे सी बी एस सी को स्कूल गेम फेडरेशन ऑफ इंडिया में शामिल हो ।
    धन्यवाद

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