नये जोश, बदले तेवर, दोस्ताना अंदाज और नई चमक के साथ लौटेगी फुटबाल

राजेंद्र सजवान
“कोविड 19 ने भले ही पूरे विश्व को दहशत और आतंक में भेज दिया है, हज़ारों जानें ली हैं और खुली हवा में विचरने वाले इंसानों को अपने अपने घरों में क़ैद कर लिया है, लेकिन वह दिन ज़्यादा दूर नहीं जब कोरोना को भागना होगा या मरना होगा और खुदा की सबसे खूबसूरत रचना फिर से चहकेगी महकेगी”, इटली के एक फुटबाल प्रेमी डाक्टर के इन शब्दों के मायने हैं और डर के साए में जी रहे इंसानों को हिम्मत दिलाने का प्रयास है|

इटली, स्पेन , इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मनी दुनिया के फुटबाल हब हैं और शायद दुनिया के नब्बे फीसदी स्टार खिलाड़ी इन देशों के विख्यात क्लबों में खेलने का सपना संजोते हैं और खुद को धन्य मानते हैं| भले ही ब्राज़ील, अर्जेंटीना, पेरू और पराग्वे जैसे लेटिन अमेरिकी देशों का फुटबाल इतिहास शानदार रहा है लेकिन यूरोप में खेलकर ही तमाम खिलाड़ी अपने फुटबाल कौशल को भाँजते हैं और करोड़ों अरबों कमाते रहे हैं|

लेकिन कोरोमा के चलते वर्ल्ड कप क्वालीफायर, यूरो कप और कोपा अमेरिका जैसे बड़े आयोजन स्थगित करने पड़े हैं जिनके शीघ्र शुरू होने की उम्मीद की जा रही है| अंतरराष्ट्रीय फुटबाल महासंघ (फ़ीफ़ा) के अध्यक्ष जियनी इन्फानटिनो ने इटली की एक न्यूज़ एजेंसी को दिए साक्षात्कार में बेह्द सकारात्मक सोच के साथ कहा है कि फुटबाल जल्दी लौटेगी लेकिन बदले हुए तेवर और आचरण के साथ|

कोरोना को हराने के बाद विश्व फुटबाल में कौशल और प्रतिस्पर्धा बढ़ेंगे लेकिन प्यार, अमन चैन, दोस्ती और सदभावना के संदेश के साथ लौटी फुटबाल का रूप स्वरूप ऐसा होगा जिसकी हर फुटबाल प्रेमी तारीफ़ करेगा| फ़ीफ़ा अध्यक्ष का मानना है कि अब जो फुटबाल खेली जाएगी वह ज़्यादा अनुशासित और दर्शनीय होने के साथ साथ इंसानियत का संदेश लिए होगी, जिसका पूरी दुनिया स्वागत करेगी| विश्व फुटबाल के तमाम बड़े क्लबों और खिलाड़ियों को पता है कि आने वाले कुछ साल खेल के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं|

लेकिन उन्हें भरोसा है कि मानवीय मूल्यों के लौटने के बाद और अधिक एवम् अधिकाधिक की भूख ज़्यादा नज़र नहीं आएगी| संभवतया, उनका इशारा रिकार्ड तोड़ क़ीमत पर खरीद फ़रोख़्त की तरफ है| बड़े क्लब , बड़े खिलाड़ी और पूर्व चैंपियनों में से ज़्यादातर मानते हैं कि फुटबाल खिलाड़ी हमेशा से मानवीय मूल्यों के कद्रदान रहे हैं और कुछ एक अवसरों को छोड़ दें तो फुटबाल देखने वाले और प्यार करने वाले भी ज़्यादातर सहृदय होते हैं|

उनका सबसे बड़ा मानवीय पहलू कोरोना काल में देखने को मिला है, जबकि हर बड़े छोटे खिलाड़ी ने बिना देश-प्रदेश की परवाह किए खुल कर दान दिया और अपने चाहने वालों और आम जन मानस का जीवन बचाया| हालाँकि पूरे विश्व के फुटबालर फिलहाल अपने अपने घरों में सिमटे हैं लेकिन उनके क्लबों और देशों ने इस बीच आफदफील्ड रणनीति ज़रूर तैयार कर ली होगी, क्योंकि उनके लिए फुटबाल ही जीवन है|

हो सकता है कि मेस्सी, रोनाल्डो, नेमार, एम्बापे, सलाह, हज़ार्ड, हैरी केन, सटर्लिंग, ग्रीज़मैन, माने, डेम्बले, सौरेज़, डिबॉला, कुटिन्हो और उनके जैसे दर्जनों खिलाड़ियों को मिलने वाले करोड़ों या अनुबंध राशि में कुछ कमी आ जाए लेकिन उनका खेल और अधिक उँचाई लिए होगा| शायद उनके खेल की चमक ही कोरोना को सही जवाब हो सकता है|

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