आईपीएल सेफ ज़ोन में बाकी लीग पर संकट

राजेंद्र सजवान
फोटो: रवीन्द्र नेगी
कोरोना पर जीत के बाद जब खिलाड़ी फिर से खेल मैदानों का रुख़ करेंगे तो शायद बहुत कुछ बदला बदला नज़र आएगा| खेल के नियम, आयोजन स्थलों पर सुरक्षा इंतज़ाम और दर्शकों की संख्या में भारी बदलाव दिखाई पड़ेगा| ऐसा इसलिए क्योंकि महामारी अपने पीछे बहुत बुरी यादें छोड़ जाएगी जिनसे खेल आयोजकों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को कदम कदम पर दो-चार होना पड़ेगा|

जहाँ तक भारतीय खेलों की बात है तो इतना तय है कि क्रिकेट जल्दी से रफ़्तार पकड़ सकती है, क्योंकि अन्य खेलों की तुलना में इस खेल का नेटवर्क ख़ासी उँचाई पर, कहीं ज्यदा आसान और सबकी पकड़ में है| भले ही आईपीएल को स्थगित करना पड़ा है लेकिन भारत की सबसे लोकप्रिय लीग को घाटे की भरपाई में ज़्यादा समय नहीं लगेगा| लेकिन बाकी लीग आयोजनों का क्या होगा और कब तक शुरू हो पाएँगी कहना मुश्किल है| आशंका यह भी है कि कुछ एक आयोजन दम तोड़ सकते हैं और उन्हें नये सिरे से शुरू करने में लंबा समय लग सकता है|

आईपीएल की शुरुआत के बाद अन्य खेलों ने अपनी लीग आयोजित कर दुनियाँ भर के खिलाड़ियों को भारत में एक ऐसा प्लेटफार्म प्रदान किया जिसने भारतीय खिलाड़ियों को अनुभव और पैसा कमाने का मौका दिया| फुटबाल, हॉकी, कबड्डी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेनिस, मुक्केबाज़ी और कुछ अन्य खेलों के लीग मुक़ाबले चल निकले| इन आयोजनों का बड़ा फ़ायदा यह हुआ कि विदेशी खिलाड़ियों के लिए भारत खाने कमाने और अनुभव हासिल करने के लिए पहली प्राथमिकता बन गया| जो विदेशी भारत को बीमारियों और कुपोषण का घर कहते थे वे बेझिजक भारत में खेलने आने लगे| आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड जैसे देशों के क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए भारत पहली प्राथमिकता बन गया है तो अन्य खेलों में भी चैम्पियन विदेशी खिलाड़ियों को भारत आने में कोई गुरेज़ नहीं|

कबड्डी लीग ने एक शुद्ध भारतीय खेल से जुड़े खिलाड़ियों का जीवन बदल दिया तो कुश्ती में भी दुनिया भर के नामी पहलवान भारत आने लगे| जिस कबड्डी और कुश्ती को कभी मिट्टी का खेल कहा जाता था उसमें लाखों बरसने लगे| स्टार ने कबड्डी खिलाड़ियों को मिट्टी से उठा कर लखपति और करोड़पति बना दिया| आईएसएल के अस्तित्व में आने के बाद से विदेशियों के साथ साथ भारतीय खिलाड़ी भी लाखों पाने लगे तो हॉकी खिलाड़ियों को भी हॉकी इंडिया लीग से काफ़ी कुछ मिला| लेकिन कोरोना के चलते तमाम खेल बहुत कुछ खो चुके हैं| उन्हें स्पॉनसर करने वाली बहुत सी कंपनियाँ और औद्योगिक घराने आर्थिक रूप से बेहद कमज़ोर हो गए हैं|

लीग टीमों के मालिकों और प्रायोजकों की ख़स्ता हालत का असर खिलाड़ियों और आयोजकों पर पड़ना स्वाभाविक है| उनकी अनुबंध राशि में कमी आ सकती है| यहाँ तक माना जा रहा है कि ज़्यादातर लीग आयोजन एक दो साल तक के लिए स्थगित भी हो सकते हैं| लेकिन क्रिकेट की गाड़ी शायद ही रुके|यही कारण है क़ी बीसीसीआई जैसा धनी बोर्ड आयोजन के लिए उतावला है और जल्दी ही आयोजन की घोषणा भी कर सकता है|

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