गुरु जी की पुण्यतिथि पर विशेष:

गुरु हनुमान अखाड़ा: क्या फिर से चैम्पियनों की फ़ौजें तैयार कर पाएगा?

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राजेंद्र सजवान

“भारतीय कुश्ती गुरु हनुमान का क़र्ज़ कभी भी नहीं चुका सकती| आज यदि कुश्ती में ओलंपिक पदक मिल रहे हैं तो इसका बड़ा श्रेय भी गुरु हनुमान को जाता है|”अक्सर इस प्रकार के सुविचार बिड़ला व्यायामशाला में पले बढ़े पहलवानों के श्रीमुख से सुनने को मिल जाएँगे| यह काफ़ी हद तक सही भी है क्योंकि गुरु हनुमान नाम के बट वृक्ष की शाखें दूर दूर तक फैल गई हैं और उनके अनेक शिष्य और उत्तराधिकारी अपने अपने अखाड़े चला रहे हैं और उनके द्वारा तैयार पहलवान ख़ासा नाम भी कमा रहे हैं|

सुशील और योगेश्वर के ओलंपिक पदकों को सतपाल अपने गुरु हनुमान का आशीर्वाद बताते हैं| इसी प्रकार कई अन्य अखाड़ों के कोच और संचालक अपने गुरु से प्रभावित हैं और कहते हैं कि जो कुछ हैं गुरुजी के आशीर्वाद से हैं| 24 मई 1999 को जब एक सड़क दुर्घटना में गुरुजी का स्वर्गवास हुआ था तो अगले ही दिन पंजाब केसरी ने अखाड़े के भविष्य पर सवालिया निशान लगाया था, जिस पर कुछ पहलवानों ने नाखुशी ज़ाहिर की और कहा कि गुरु जी के जाने के बाद भी उनका अखाड़ा श्रेष्ठ पहलवानों की फ़ौजें तैयार करता रहेगा|

लेकिन पिछले बीस सालों के प्रदर्शन पर नज़र दौड़ाएँ तो वही पहलवान राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन पाए जिन्हें गुरु हनुमान अपने जीते जी सींच गये थे, जिनमें सुजित मान, राजीव तोमर, अनुज चौधरी जैसे कुछ नाम शामिल हैं| लेकिन साल दर साल देश का सबसे कामयाब अखाड़ा सिकुड़ता चला गया| एक जमाना वह भी था जब बिड़ला व्यायामशाला के पहलवानों के बिना ओलंपिक टीम का गठन नहीं हो पता था | अनेक अवसरों पर एशियाड, कामनवेल्थ, ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में अधिकाधिक पहलवान इसी अखाड़े के होते थे|

आज आलम यह है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व का अकाल सा पड़ गया है| अखाड़े को मान सम्मान दिलाने में पहलवान सुदेश कुमार, प्रेमनाथ, सतपाल, करतार, जगमिंदर, सुभाष, दर्जनों अन्य अंतरराष्ट्रीय पहलवानों, कोच राम धन, राज सिंह,महासिंह राव आदि का बड़ा योगदान रहा है| इन सभी ने माना कि अनपढ़ गुरु हनुमान के पास कोई जादुई छड़ी थी, जिसके दम पर अखाडें ने अनेक द्रोणाचार्य, अर्जुन और पद्मश्री पैदा किए और ढेरों अंतरराष्ट्रीय पदक जीते| लेकिन आज बिड़ला मिल से मिली सौगात पर संकट नज़र आता है|

अब वहाँ पहलवानों की फ़ौजें तैयार नहीं होतीं| ख़ासकर, साई कोच और गुरु के सबसे विश्वासपात्र द्रोणाचार्य महासिंह राव के सेवानिवृत होने के बाद से हालात बहुत अच्छे नहीं रहे| हालाँकि राव कहते हैं कि महाबली सतपाल, जगमिंदर, राज सिंह, राजीव, अनुज, सुजीत और कुछ अन्य के सहयोग से एक ट्रस्ट का गठन किया गया है और अखाड़े को नया और अत्याधुनिक बनाया जा रहा है, जिसमें बिड़ला मिल सहयोग कर रहा है|

लेकिन गुरु हनुमान अखाड़ा फिर से चैम्पियन पैदा कर पाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा| अफ़सोस की बात यह है कि दिल्ली के जिन अखाड़ों की धूम होती थी उन सबका हाल बेहाल है| मास्टर चंदगी राम अखाड़ा, कैप्टन चाँद रूप अखाड़ा, खलीफा बद्री अखाड़ा, खलीफा जसराम अखाड़ा आदि अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं| कुछ एक तो बस कागजों में चल रहे हैं| गुरु हनुमान अखाड़े का भविष्य बिड़ला मिल पर निर्भर है| देखना यह होगा कि गुरु के शिष्य कब तक अपने अखाड़े को जिंदा रख पाते हैं!

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