खेलों में चीनी घुसपैठ ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी!

राजेन्द्र सजवान

रविन्द्र सिंह बिष्ट (क्रिएटर)

चीन के साथ सीमा विवाद ने भारतीय खेलों को भी गहरे संकट में डाल दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि यदि भारत और चीन के संबंधों में सुधार नहीं हुआ और भारत में चीनी उत्पादों को लेकर विरोध और बहिष्कार के सुर तेज होते रहे तो बहुत से खेल आयोजन किसी विकल्प के अभाव में दम तोड़ सकते हैं।

आम खेल प्रेमी जानते हैं कि क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल है, जिसकी इंडियन प्रीमियर लीग का टाइटल स्पांसर चीनी मोबाइल कंपनी वीवो है। हैरानी वाली बात यह है कि क्रिकेट चीन का खेल नहीं है फिरभी वह बीसी सी आई और आईपीएल से खेल रहा है। चीनी ब्रांड और बीसीसीआई के बीच करीब 2000 करोड़ की डील है। अर्थात भारत के कुल खेल बजट से भी बड़ी धनराशि आईपीएल पर खर्च की जा रही है। चीनी कंपनी के क्रिकेट प्रेम को कूटनीतिक चश्मे से देखें तो कुछ कुछ ईस्टइंडिया कंपनी जैसी रणनीति नज़र आती है। क्रिकेट खेलते नहीं लेकिन तमाशेबाजी में भागीदारी के मायने समझ सकते हैं। भारतीय मार्किट को कब्जाने का यह चीनी षड्यंत्र गोरों किरणनीति की याद दिलाता है।

आईपीएल के ऑफिशियल ब्रॉडकास्टर स्टार इंडिया ने पिछले साल दो हजार करोड़ रुपये कमाए थे। सीधा सा मतलब है कि यदि वीवो का बहिष्कार करना पड़ा तो बड़े राजश्व का नुकसान होगा। लेकिन बीसी सीआई और आईपीएल ने देश हित के अनुसार मूड बना लिया है और इशारा मिलते ही वीवो का दामन झटकना पड़ सकता है। शुरू शुरू में यह करार 2015-16 के लिए था लेकिन फायदे का सौदा देखते हुए वीवो ने 2022 तक बढ़ा दिया।
बीसीसीआई को फीफा के बाद किसी खेल की सबसे धनाढय संस्था माना जाता है ।

फीफा विश्व कप 2018 के सफल आयोजन के बाद 2022 के विश्व कप का प्रायोजक भी वीवो है। अर्थात चीनी कंपनी का जादू दुनिया भर के खेल आयोजनों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। जहां तक भारत की बात है तो भारतीय खेल वीवो और कुछ अन्य चीनी कंपनियों के मोहताज़ होकर रह गए हैं। टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों हेतु भारतीय ओलंपिक संघ और वीवो के बीच करार हुआ था, जिसके तहत खिलाड़ियों के स्पोर्ट्स वेयर का खर्च चीनी कंपनी द्वारा उठाया जाना है। आईओए पर भी बहिष्कार का दबाव बढ़ रहा है। आईओए अध्यक्ष डॉक्टर बत्रा और महासचिव राजीव मेहता पहले ही कह चुके हैं कि वह देशहित में कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

प्रो कबड्डी लीग का टाइटल स्पांसर भी वीवो है, जिसने कबड्डी के साथ 2017 में पांच साल का करार किया है। ज़ाहिर है कबड्डी भी उन खेलों में शामिल है, जिन्हें देश हित के लिए वीवो का साथ छोड़ना पड़ सकता है। एक अन्य चीनी कंपनी ली निंग का भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी , ओलंपिक और विश्व रजत पदक विजेता पीवी सिंधू के साथ 50 करोड़ का अनुबंध है, जिसे लेकर सिंधु को अपने स्तर पर निपटना पड़ेगा। लेकिन आईपीएल और कबड्डी लीग को करार टूटने पर बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है, जिसके लिए पूरा देश एकराय है।

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