ओलंपिक खेलों के सहायक खेल हो सकते हैं स्वदेशी खेल

राजेंद्र सजवानचूँकि सरकार आत्मनिर्भर भारत के लिए कटिबद्ध है और स्वदेशी को प्राथमिकता मानती है, यही कारण है कि भूले बिसरे विशुद्ध भारतीय खेलों को बढ़ावा देने के प्रयास भी ज़ोर पकड़ने लगे हैं। वर्ष 2020 के खेल पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों और कोचों में मलखम्ब के कोच को द्रोणाचार्य सम्मान दिया जाना सीधा सीधा … Continue reading ओलंपिक खेलों के सहायक खेल हो सकते हैं स्वदेशी खेल

क्रिकेट माँगे मोर; लेकिन बाकी खेल कब सुधरेंगे? कब स्वदेशी की कद्र जानेंगे?

राजेंद्र सजवानभले ही अधिकांश भारतीय खेल क्रिकेट को अपनी प्रगति में बाधक मानते हैं, जोकि सच नहीं है लेकिन यह सच्चाई है कि क्रिकेट ने कभी भी आलोचनाओं की परवाह नहीं की। उसकी अपनी दुनिया है, अपने कायदे क़ानून हैं। लेकिन जब जब क्रिकेट के अपनों ने आवाज़ उठाई या सुधार के लिए कोई सुझाव … Continue reading क्रिकेट माँगे मोर; लेकिन बाकी खेल कब सुधरेंगे? कब स्वदेशी की कद्र जानेंगे?

फुटबाल ने सब कुछ दिया, नईम संभाल नहीं पाए! अर्जुन और द्रोणाचार्य मिला, अब दाने दाने को मोहताज़ !!

राजेंद्र सजवानभारतीय फुटबाल, फुटबाल प्रेमियों और देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों और गुरुओं को सम्मान बाँटने वाली सरकारों के लिए एक दुखद और शायद शर्मसार कर देने वाली खबर यह है कि सैयद नईमुद्दीन की माली हालत ठीक नहीं है और नौबत यहाँ तक आ गई है कि उनके चाहने वाले व्यक्तिगत स्तर पर मदद करने … Continue reading फुटबाल ने सब कुछ दिया, नईम संभाल नहीं पाए! अर्जुन और द्रोणाचार्य मिला, अब दाने दाने को मोहताज़ !!

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को नौकरी: अर्थात राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी देश पर बोझ!

राजेंद्र सजवान'पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब", इस कहावत को झुठलाने वाले अब एक बार फिर से सोचने लगे हैं। आज के भारत पर सरसरी नज़र डालें तो देश में करोड़ों पढ़े लिखे बेरोजगार धक्के खा रहे हैं और खेल में रिकार्ड तोड़ प्रदर्शन करने वालों को भी रोज़गार नसीब नहीं है। ऐसा … Continue reading अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को नौकरी: अर्थात राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी देश पर बोझ!

आदर्श शिक्षक की जगह अब फर्जी द्रोणाचार्य !

राजेन्द्र सजवान 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े…', संत कबीर दास की इन पंक्तियों का महत्व युगों युगों तक रहेगा। भले ही हमारे समाज में गुरु की महिमा को कमतर आंकने की होड़ ही क्यों न लगी हो। लेकिन जहां गुरु का दर्जा भगवान से पहले या समकक्ष नहीं होगा वह समाज शायद ही कभी तरक्की कर … Continue reading आदर्श शिक्षक की जगह अब फर्जी द्रोणाचार्य !

भारतीय खेलों का नासूर: बेलगाम खेल संघ!

राजेन्द्र सजवानओलंपिक खेलों में भारतीय भागीदारी सौ साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी है। लेकिन पदकों के लिहाज से भारत आज भी दुनिया के सबसे पिछड़े खेल राष्ट्रों में है। यदि हॉकी के आठ स्वर्ण पदकों को छोड़ दिया जाए तो भारतीय प्रदर्शन बेहद दयनीय रह जाता है। और यदि 2012 के लंदन खेलों में … Continue reading भारतीय खेलों का नासूर: बेलगाम खेल संघ!