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पैरा खिलाड़ी होंगे माला माल लेकिन…… पदक विजेताओं की पुरस्कार राशि में एकरूपता क्यों नहीं?

राजेंद्र सजवानओलंपिक पदक जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है लेकिन अपने देश में बिरले ही यह उपलब्धि हासिल कर पाते हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का हाल यह है कि पिछले सवा सौ सालों में हमारे खिलाड़ी मात्र 28 ओलंपिक पदक जीत पाए हैं जिनमें 11 हॉकी के नाम दर्ज हैं। लेकिन इस … Continue reading पैरा खिलाड़ी होंगे माला माल लेकिन…… पदक विजेताओं की पुरस्कार राशि में एकरूपता क्यों नहीं?

(पुण्यतिथि पर विशेष) जसदेव सिंह: महान कमेंटेटर, नेक इंसान और यारों के यार!

राजेन्द्र सजवान,पिछले तीन महीनों में शायद ही कोई दिन ऐसा बीता होगा जब मैंने देश के सर्वकालीन श्रेष्ठ कमेंटेटर जसदेव सिंह जी का स्मरण ना किया हो। हालांकि दो साल पहले आज 25 सितंबर को उनका स्वर्गवास हो गया था। लेकिन मुझे हमेशा यह टीस रही कि किसी कारणवश, उनकी अंतिम यात्रा में शामिल नहीं … Continue reading (पुण्यतिथि पर विशेष) जसदेव सिंह: महान कमेंटेटर, नेक इंसान और यारों के यार!

ओलंपिक खेलों के सहायक खेल हो सकते हैं स्वदेशी खेल

राजेंद्र सजवानचूँकि सरकार आत्मनिर्भर भारत के लिए कटिबद्ध है और स्वदेशी को प्राथमिकता मानती है, यही कारण है कि भूले बिसरे विशुद्ध भारतीय खेलों को बढ़ावा देने के प्रयास भी ज़ोर पकड़ने लगे हैं। वर्ष 2020 के खेल पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों और कोचों में मलखम्ब के कोच को द्रोणाचार्य सम्मान दिया जाना सीधा सीधा … Continue reading ओलंपिक खेलों के सहायक खेल हो सकते हैं स्वदेशी खेल

क्रिकेट माँगे मोर; लेकिन बाकी खेल कब सुधरेंगे? कब स्वदेशी की कद्र जानेंगे?

राजेंद्र सजवानभले ही अधिकांश भारतीय खेल क्रिकेट को अपनी प्रगति में बाधक मानते हैं, जोकि सच नहीं है लेकिन यह सच्चाई है कि क्रिकेट ने कभी भी आलोचनाओं की परवाह नहीं की। उसकी अपनी दुनिया है, अपने कायदे क़ानून हैं। लेकिन जब जब क्रिकेट के अपनों ने आवाज़ उठाई या सुधार के लिए कोई सुझाव … Continue reading क्रिकेट माँगे मोर; लेकिन बाकी खेल कब सुधरेंगे? कब स्वदेशी की कद्र जानेंगे?

फुटबाल ने सब कुछ दिया, नईम संभाल नहीं पाए! अर्जुन और द्रोणाचार्य मिला, अब दाने दाने को मोहताज़ !!

राजेंद्र सजवानभारतीय फुटबाल, फुटबाल प्रेमियों और देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों और गुरुओं को सम्मान बाँटने वाली सरकारों के लिए एक दुखद और शायद शर्मसार कर देने वाली खबर यह है कि सैयद नईमुद्दीन की माली हालत ठीक नहीं है और नौबत यहाँ तक आ गई है कि उनके चाहने वाले व्यक्तिगत स्तर पर मदद करने … Continue reading फुटबाल ने सब कुछ दिया, नईम संभाल नहीं पाए! अर्जुन और द्रोणाचार्य मिला, अब दाने दाने को मोहताज़ !!

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को नौकरी: अर्थात राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी देश पर बोझ!

राजेंद्र सजवान'पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब", इस कहावत को झुठलाने वाले अब एक बार फिर से सोचने लगे हैं। आज के भारत पर सरसरी नज़र डालें तो देश में करोड़ों पढ़े लिखे बेरोजगार धक्के खा रहे हैं और खेल में रिकार्ड तोड़ प्रदर्शन करने वालों को भी रोज़गार नसीब नहीं है। ऐसा … Continue reading अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को नौकरी: अर्थात राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी देश पर बोझ!