कॉमनवेल्थ के आईने में एशियाड की तस्वीर
- मेजबान स्कॉटलैंड कुल बीस में से आधे (10) खेलों का आयोजन ही हो पाया
- भारतीय खिलाड़ियों ने 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी तैयारी के दर्शन करा दिए हैं
- यदि एशियाड में हम 25-30 गोल्ड और 100 से 110 पदक जीत पाए तो मानना पड़ेगा कि भारतीय खेल सही दिशा की ओर बढ़ रहे हैं और खेल महाशक्तियों से अंतर कम हो सकता है
राजेंद्र सजवान
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन कैसा रहा और इन खेलों में किए गए प्रदर्शन के बाद भारतीय खेलों की कैसी तस्वीर उभर कर आती है यह बहस का मुद्दा हो सकता है। इसलिए क्योंकि कुल बीस में से आधे (10) खेलों का आयोजन ही हो पाया। हो सकता है कि मेजबान की अपनी मजबूरी रही लेकिन 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी तैयारी के दर्शन करा दिए हैं।
खासकर, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो और पैरा खेलों में किया गया प्रदर्शन अभूतपूर्व रहा। यह करिश्मा तब और बड़ा हो सकता था जबकि शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी टेबल टेनिस, तीरंदाजी, क्रिकेट, कबड्डी आदि खेलों को भी ग्लास्गो खेलों में शामिल किया जाता। सही मायने में यही खेल भारत की असली ताकत और दमदार इंजन माने जाते रहे हैं, जिनकी ताकत आगामी एशियाई खेलों में देखने को मिलेगी।

मौके के साथ-साथ दस्तूर भी है और एशियाड भी ज्यादा दूर नहीं है। ऐसे में एशियाड के आईने में कॉमनवेल्थ गेम्स के नतीजों को देखा परखा जा सकता है। अर्थात् कॉमनवेल्थ गेम्स के प्रदर्शन पर इतराने की बजाय एशियाड की चुनौतियों को समझ लेना चाहिए, जिसमें खेल महाशक्ति चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान, उज्बेकिस्तान, कजाकस्तान आदि ताकतवर खेल राष्ट्र हमारे बहुत से पदक छीन सकते हैं। जहां एक तरफ कबड्डी, कुश्ती, हॉकी, शूटिंग, क्रिकेट, एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस जैसे खेलों में पदक तय हैं लेकिन तैराकी और जिम्नास्टिक जैसे पदकों की भरमार वाले खेलों में हम गहराई तक डूबे हुए हैं।

यदि एशियाड में हम 25-30 गोल्ड और 100 से 110 पदक जीत पाए तो मानना पड़ेगा कि भारतीय खेल सही दिशा की ओर बढ़ रहे हैं और खेल महाशक्तियों से अंतर कम हो सकता है। वरना झूठ और हवाई किले बनाने वाली राजनीति की पोल खुल सकती है। यह ना भूले कि ग्लास्गो में ऑस्ट्रेलिया ने 70 स्वर्ण समेत कुल 170 पदक जीतकर जो श्रेष्ठता दर्ज की उस तक पहुंचने में सालों लग सकते हैं। इंग्लैंड और कनाडा भी भारत से बहुत आगे रहे। ऐसे में भारतीय खेलों को इतराने से पहले आईना जरूर देख लेना चाहिए।
