उम्र की धोखाधड़ी से शर्मसार हॉकी!
- कुछ पूर्व खिलाड़ियों और कोचों ने शर्मनाक पराजयों के लिए खिलाड़ियों की उम्र को सबसे बड़ा कारण बताया
- एक पूर्व कोच ने तो यहाँ तक कह दिया कि हमारे ज्यादातर खिलाड़ी बुढ़ा गए हैं जिनके आयु प्रमाण पत्रों में पांच से सात साल की हेरा-फेरी का अंदेशा है
- यही बेहतर होगा कि पूरी टीम को बदल कर नये, युवा और सही उम्र के खिलाड़ियों को मौका दिया जाए
- एफ आई एच प्रो लीग में अपने घरेलू मैदान पर खेले गए पहले तीन मैचों में भारतीय खिलाड़ी बेल्ज़ियम और अर्जेंटीना के युवाओं के मुकाबले महाफिसड्डी साबित हुए
राजेंद्र सजवान
एफ आई एच प्रो लीग में अपने घरेलू मैदान पर खेले गए पहले तीन मैचों में मेजबान खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देख कर हालांकि देश के तथाकथित हॉकी एक्सपर्टस की बोलती बंद है लेकिन कुछ एक हैं जोकि अपने खिलाड़ियों के शर्मनाक खेल पर जमकर बरस रहे हैं। पहले तीन मैचों में 15 गोल गटकने वाली टीम का पोस्टमॉर्टेम करने पर लगता है जैसे बीस साल के युवाओं के विरुद्ध हमारे चालीस साल के थके मांदे बूढ़े खेल रहे हैं।

कुछ पूर्व ओलम्पियनों के अनुसार, अपने मैदान और दर्शकों के सामने भारतीय खिलाड़ी बिना किसी प्लानिंग के खेलते नज़र आए। उनके पास कोई रणनीति नहीं, पासिंग, बॉल कंट्रोल, टर्निंग, रफ़्तार, स्कोरिंग योग्यता, स्पीड, स्टेमिना और हर क्षेत्र में भारतीय खिलाड़ी बेल्ज़ियम और अर्जेंटीना के युवाओं के मुकाबले महाफिसड्डी साबित हुए। दूसरी तरफ प्रतिद्वन्द्वी खिलाड़ी मेजबान पर जब चाहे गोल जमाते रहे। कुछ पूर्व खिलाड़ियों और कोचों से जब इस बारे में पूछा गया तो अधिकांश ने शर्मनाक पराजयों के लिए खिलाड़ियों की उम्र को सबसे बड़ा कारण बताया। उनके अनुसार, हॉकी इंडिया को सबसे पहले अपने खिलाड़ियों की उम्र की पड़ताल करनी चाहिए।

अपना नाम ना छापने की शर्त पर एक पूर्व कोच ने तो यहाँ तक कह दिया कि हमारे ज्यादातर खिलाड़ी बुढ़ा गए हैं। जहाँ एक तरफ विदेशी टीमों में युवा खिलाड़ियों की भरमार है तो हमारी टीम के ज्यादातर खिलाड़ी बूढ़े हैं जिनके आयु प्रमाण पत्रों में पांच से सात साल की हेरा-फेरी का अंदेशा है। ऐसे खिलाड़ियों के लिए वर्तमान हॉकी में कोई जगह नहीं है।

यह सही है कि एक पहलवान भारतीय हॉकी का खैरख्वाह बना हुआ है और टीम प्रबंधन में गड़बड़झाला चल रहा है। हो सकता है टीम चयन में धांधली हुई हो लेकिन अपने कोचों की अनदेखी और विदेशियों को गले लगाने को भी बड़ा कारण बताया जा रहा है। लेकिन उम्र की धोखाधड़ी के नतीजे साफ दिखाई दे रहे हैं। ज्यादातर पूर्व खिलाड़ी और कोच मेजबान टीम को शारीरिक और मानसिक तौर पर अनफिट करार दे रहे हैं। इसलिए क्योंकि अधिकांश खिलाड़ी उम्र की धोखाधड़ी के चलते वर्तमान हॉकी के लिए पूरी तरह अनफिट हैं। ऐसे में यही बेहतर होगा कि पूरी टीम को बदल कर नये, युवा और सही उम्र के खिलाड़ियों को मौका दिया जाए। लेकिन देश, देश की हॉकी और लाखों करोड़ों हॉकी प्रेमियों के साथ विश्वासघात करने वालों को यूँ ही माफ़ करना न्यायसंगत नहीं होगा।

