एक शानदार खेल प्रशासक के तौर पर याद रखे जाएंगे कलमाड़ी
- सुरेश कलमाड़ी के भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) अध्यक्ष रहते हुए दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का आयोजन हुआ
- लेकिन कॉमनवेल्थ घोटाले ने मजबूत खेल प्रशासक की छवि पर दाग लगाया और वह जेल भी गए लेकिन पाक-साफ छवि के साथ रिहा भी हुए
राजेंद्र सजवान
पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जाने-माने खेल प्रशासक, आईएएफ पायलट और भारतीय ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता से भारतीय खेलों को इतना कुछ दिया है, जिसकी प्रशंसा देश और दुनिया के खेल प्रशासक, खिलाड़ी और खेल पत्रकार करते नहीं थकते। भले ही उनके भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) अध्यक्ष रहते कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला हुआ। अनेकों के साथ उन्हें भी जेल जाना पड़ा और फिर पाक-साफ छवि के साथ रिहा भी हुए लेकिन उनके आईओए और एथलेटिक्स संघ का अध्यक्ष रहते भारतीय खेलों और खिलाड़ियों जो अंतरराष्ट्रीय मान-सम्मान पाया उसकी प्रशंसा विदेशी खिलाड़ियों और मीडिया द्वारा भी की गई।

बेशक, कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में करोड़ों के घोटाले हुए लेकिन कलमाड़ी इसलिए लपेटे में आए क्योंकि वह आईओए और खेल आयोजन समिति के मुखिया थे। सही मायने में असली घोटालेबाज कोई और थे, जिन्होंने कलमाड़ी की आड़ में जमकर लूट मचाई, जेल गए और ज्यादातर सजा भुगत कर लौट आए हैं और फिर से भारतीय खेलों को दीमक की तरह चाटने लगे हैं।

सही मायने में आज भारतीय खेल जिस मुकाम पर है और जो छुटपुट कामयाबी पा रहे हैं उसमें कलमाड़ी और आईओए महासचिव राज रणधीर सिंह की जोड़ी को बड़ा श्रेय जाता है। कलमाड़ी का बड़प्पन यह रहा कि उन्होंने आईओए के अन्य सदस्यों पर आंख बंद करके भरोसा किया और कॉमनवेल्थ घोटाले में बेवजह लपेटे गए। लेकिन भारतीय खेल प्रेमी शायद उस दौर को नहीं भूले होंगे जब सर्गेई बुबका (दिग्गज पोल वॉल्ट एथलीट), कार्ल लुईस (पूर्व ओलम्पिक चैम्पियन स्प्रिंटर), जैकी जॉयनर (मशहूर महिला धाविका), टॉनी ब्लेयर जैसे महान एथलीट भारत आए थे और भारतीय एथलेटिक्स प्रेमियों को रोमांचित किया था। यह सब कलमाड़ी के रहते संभव हो पाया। उसके बाद क्या हुआ खेल प्रेमियों के सामने है।

कलमाड़ी के कार्यकाल में भारत ने पहला ओलम्पिक गोल्ड जीता था और उनके मार्गदर्शन का फल है कि भारत बाद के खेलों में पदक जीत पाया। आज तमाम खेल फेडरेशनों के अध्यक्ष और आईओए के बड़े प्रशासक मीडिया से दूर भागते हैं लेकिन कलमाड़ी मीडिया के लिए यारों के यार थे। बावजूद इसके कि मीडिया उनके खिलाफ लिखने, छापने में कोताही नहीं बरतता था।
