पुरुष मैराथन रनर्स के प्रति नरमी, महिलाओं के प्रति कठोरता
- सुनीता गोदारा ने माना कि एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की दूरदर्शिता की कमी से महिलाओं के हाथ से मौका फिसल गया
- पूर्व एशियन मैराथन चैंपियन बोली, अगर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ना ही मानक होता तो तीनों पुरुष मैराथन रनर भी क्वालीफाई नहीं कर पाते
- नई दिल्ली मैराथन के जरिये शीर्ष तीन स्थानों पर रहे कार्तिक, गोपी और मान सिंह ने एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई किया
- शीर्ष दो स्थानों पर रही निरमाबेन और भागीरथी अपने सर्वश्रेष्ठ समय निकालने के बावजूद जापान का टिकट नहीं कटा पाई
अजय नैथानी
गत रविवार को भारत की राजधानी में संपन्न हुई नई दिल्ली मैराथन 2026 के जरिये तीन भारतीय पुरुष एथलीटों ने इस साल सितंबर में आगामी एशियन गेम्स के लिए टोक्यो का टिकट कटाया, लेकिन कोई भी महिला मैराथन धाविका भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगी। इसकी वजह है कि रविवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित हुई मैराथन में कोई भी एलीट महिला रनर एशियन गेम्स के क्वालीफाइंग मार्क 2:31:52 के समय को हासिल करना तो दूर, उसके करीब तक नहीं पहुंच पाई। इस मामले में पूर्व एशियन चैंपियन सुनीता गोदारा ने अपनी राय रखते हुए एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) की दूरदर्शिता की कमी को दोषी ठहराया है और इस वरिष्ठ खेल संवाददाता के साथ खास बातचीत में अपनी राय रखी।

- पुरुष कैसे क्वालीफाई कर गए?
1992 में इंडोनेशिया के बनदुंग में आयोजित एशियन मैराथन चैंपियनशिप जीतने वाली सुनीता गोदारा इस मामले में कई सवाल उठाती हैं। वह कहती हैं, “नई दिल्ली मैराथन के परिणाम के बाद विजेता कार्तिक (जो टाटा मुंबई मैराथन भी जीत चुके हैं), मान सिंह और गोपी टी. ने एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया है।” इस बारे में वह विस्तार से समझाती हैं, “पुरुष मैराथन में राष्ट्रीय रिकॉर्ड 2 घंटे, 12 मिनट था जबकि एशियन गेम्स क्वालीफाइंग समय 2 घंटे, 15 मिनट और 04 सेकेंड था। ऐसा लगता है कि फेडरेशन पुरुषों के साथ थोड़ा नरम नजर आई। क्योंकि उपरोक्त तीनों पोडियम फिनिशर 2 घंटे 13 मिनट के साथ क्वालीफाई तो कर गए लेकिन राष्ट्रीय रिकॉर्ड से पीछे रह गए।”
- लेकिन महिला रनर्स कैसे पीछे छूट गईं?
पूर्व मैराथन धाविका इस बारे में बताती हैं, “मुझे लगता है कि एएफआई लड़कियों के मामले में थोड़ा कठोर नजर आई। क्योंकि राष्ट्रीय रिकॉर्ड 2 घंटे, 34 मिनट (ओपी जैशा, 2015 में) था जबकि एशियन गेम्स क्वालीफाइंग समय 2 घंटे, 31 मिनट और 52 सेकेंड रख दिया गया। जब आप क्वालीफाइंग समय इतना मुश्किल रखते हैं, जो आपके राष्ट्रीय रिकॉर्ड से बहुत कम था। तो इसका मतलब था कि फेडरेशन किसी भी महिला मैराथन रनर को जापान नहीं भेजना चाहती है।”

सुनीता गोदारा फेडरेशन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, “मुझे नहीं लगता कि एएफआई किसी महिला मैराथन रनर को क्वालीफाई करवाकर एशियन गेम्स भेजेगी, क्योंकि उसने लगभग असंभव सा क्वालीफाइंग मार्क सेट किया है, जो कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड से भी बहुत कम समय है। इसके उलट फेडरेशन ने पुरुषों के साथ बेहद नरमी दिखाई। पुरुषों के लिए जो क्वालीफाइंग मार्क 2:15 रखा गया, वो राष्ट्रीय रिकॉर्ड 2:12 से बहुत ज्यादा था।”
- शीर्ष दो महिला एथलीटों को क्वालीफाई करवा कर भेजा चाहिए था
अपने जमाने की शीर्ष मैराथन रनर रहीं गोदारा ने आगे कहा, “अगर एएफआई अपनी चैंपियन महिला मैराथन रनर्स को भेजना चाहती तो वो राष्ट्रीय रिकॉर्ड 2:34 को ही बेंच मार्क रख लेती या फिर 2:35, 2:36, 2:37 तक का ज्यादा समय क्वालीफाइंग मार्क सेट करती। लेकिन फेडरेशन ने ऐसा नहीं किया। मुझे लगता है कि आपको अपनी कम से कम शीर्ष की दो चैंपियन रनर्स को क्वालीफाई करवा कर एशियन गेम्स के लिए भेजना चाहिए था।”

इंटरव्यू के दौरान आई नई दिल्ली मैराथन की विजेता ठाकोर निरमाबेन भारतजी (02:41:15) से सुनीता गोदारा ने मुलाकात कराई। जब निरमाबेनन से निरमाबेन से उनके प्रदर्शन के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब था, “मैंने यह मैराथन जीती है। दो घंटे 41 मिनट में।” इस पर सुनीता सवाल उठाती है, “निरमाबेन ने नेशनल चैंपियनशिप में खिताब जीता है, मेरे हिसाब से वो नेशनल चैंपियन हैं और इस कारण उसे भेजा जाना चाहिए।” सुनीता ने कहा, “अगर महिलाओं का क्वालीफाइंग टाइम दो घंटे 37 मिनट रखा गया होता तो यह एथलीट ज्यादा जोर लगाती क्योंकि शीर्ष की दो रनर्स ने अपनी टाइमिंग सुधारी है।” पूर्व मैराथन रनर के इस तर्क की हामी निरमाबेन ने भरी और कहा कि वो उपरोक्त समय भी निकाल सकती थीं।

वरिष्ठ पत्रकार
