फुटबॉल: गेबोन से सीखे भारत
- लगभग 24 लाख की आबादी वाले अफ़्रीकी देश ने ख़राब प्रदर्शन के चलते अपनी राष्ट्रीय फुटबॉल फेडरेशन, कोच और प्रमुख खिलाड़ियों को ससपेंड किया
- यह खबर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की फुटबाल के लिए सीख और सबक हो सकती है
- देशभक्ति और फुटबॉल प्रेम का ढोंग रचने वाली भारतीय फेडरेशन, पैसे के भूखे और देश की बजाय रुपए डॉलरों को महत्व देने वाले खिलाड़ियों के लिए सबक और चेतावनी है
राजेंद्र सजवान
लगभग 24 लाख की आबादी वाले अफ़्रीकी देश गेबोन ने ख़राब प्रदर्शन के चलते अपनी राष्ट्रीय फुटबाल फेडरेशन, कोच और प्रमुख खिलाड़ियों को ससपेंड कर दिया है। खबर है कि पिछले काफ़ी समय से देश की फुटबॉल में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। खासकर, राष्ट्रीय टीम, टीम प्रबंधन, खिलाड़ी और कोच कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे थे। ऐसे में देश की सरकार ने आगे बढ़ कदम उठाया और भ्रष्ट, लुटेरी और नाकारा फेडरेशन के साथ-साथ खलीफा प्रवृति के खिलाड़ियों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।

यह खबर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की फुटबॉल के लिए सीख और सबक हो सकती है लेकिन देशभक्ति और फुटबॉल प्रेम का ढोंग रचने वाली भारतीय फेडरेशन, पैसे के भूखे और देश की बजाय रुपए डॉलरों को महत्व देने वाले खिलाड़ियों के लिए सबक और चेतावनी है। लेकिन डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाले देश की सरकार पिद्दी से अफ़्रीकी देश जितना माद्दा नहीं रखती। वरना क्या कारण है कि लगातार नीचे लुढ़क रही, बर्बाद हो रही और समस्याओं से लुटी-पिटी भारतीय फुटबॉल के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो पाई?
इधर, अपने देश में भी कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। फेडरेशन तो कब का सरेंडर कर चुकी है लेकिन अपने देश की सरकार मौन धारण किए है। भारतीय फुटबॉल को बर्बाद करने वाली एआईएफएफ की नाक के नीचे खेल से खिलवाड़ हो रहा है। मैच दर मैच फुटबॉल की हानि हो रही है लेकिन फेडरेशन अध्यक्ष कल्याण चौबे का कोई बाल भी बांका नहीं कर पाया। आईएसएल की बदहाली देख कर विदेशी खिलाड़ी भारतीय क्लबों से नाता तोड़ रहे हैं। स्वदेशी खिलाड़ियों के भी लाले पड़े हैं राष्ट्रीय टीम को सेवाएं देने से कतराने वाले अपने खिलाड़ी जाएं तो कहाँ। लेकिन अब फीफा से गुहार लगा रहे हैं और भारतीय फुटबॉल और आईएसएल के लिए भीख माँगने की नौबत आ है।

प्राकृतिक और आर्थिक संस्थानों की कमी और कुपोषण के चलते अफ़्रीकी महाद्वीप गरीबी और भुखमरी का शिकार है लेकिन फुटबॉल में उसका कोई सानी नहीं। विश्व फुटबॉल में अफ़्रीकी खिलाड़ी धमाल मचा रहे हैं। यूरोप और लेटिन अमेरिकी देशों की लीग फुटबॉल में उनका बड़ा नाम सम्मान है। ज़ाहिर है गेबोन वासियों को अपनी फुटबॉल की बदहाली पर गुस्सा आया होगा। लेकिन इधर अपने देश में फुटबॉल की बदहाली पर किसी को शर्म नहीं आ रही। सरकारी को भी नहीं!
