March 23, 2026

sajwansports

sajwansports पर पड़े latest sports news, India vs England test series news, local sports and special featured clean bold article.

भारतीय फुटबॉल की हवा फुस्स क्यों है?

  • लगभग दर्जन भर पूर्व फुटबॉलरों, कोचों और वरिष्ठ खेल पत्रकारों के अनुसार, पचास-साठ साल पहले भारत एशिया और अंतरराष्ट्रीय पटल पर तेजी से आगे बढ़ रहा था अब घिसट-घिसट कर चल रहा है
  • पूर्व खिलाड़ियों की राय में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने से अच्छे खिलाड़ी मिलेंगे
  • विदेशी कोचों की नियुक्ति से भी कोई फायदा नहीं हुआ, लिहाजा बेहतर होगा कि सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर स्तर पर अपने कोच आजमाए जाएं
  • सिफारिशी, जुगाड़ू और फर्जी सर्टिफिकेट वाले कोचों, मैच फिक्सिंग से जुड़े खिलाड़ियों और क्लबों को खोज कर कठोर दंड दिया जाना भी जरूरी है
  • जो राज्य संघ सट्टेबाजी, फिक्सिंग और लूट-खसोट में लिप्त हैं उनके उच्च अधिकारियों और उनके मुंह लगे क्लबों को लतियाने और कठोर दंड देने का वक्त आ गया है

राजेंद्र सजवान

“भारतीय फुटबॉल आज जहां खड़ी है वहां से हर रास्ता गर्त में जाता हैl फेडरेशन(एआईएफएफ), कोच, खिलाड़ी और तमाम लोग चाहे जितने भी प्रयास करें हमारी फुटबॉल का इसलिए भला नहीं होने वाला क्योंकि भारतीय फुटबॉल की जड़ों में भ्रष्टाचार, फिक्सिंग, सट्टेबाजी और तमाम अनियमितताओं का तेज़ाब फ़ैल चुका है,” कुछ पूर्व फुटबॉलरों और कोचों का ऐसा मानना है। लगभग दर्जन भर पूर्व खिलाड़ियों, कोचों और वरिष्ठ खेल पत्रकारों से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि पचास-साठ साल पहले जो देश एशिया और अंतरराष्ट्रीय पटल पर तेजी से आगे बढ़ रहा था अब घिसट-घिसट कर चल रहा है।

   फुटबॉल की समझ रखने वाले जानते हैं कि दो बार एशियाई खेलों में खिताबी जीत दर्ज करने वाले और ओलम्पिक में भागीदारी का सम्मान पाने वाले देश को एक समय एशिया का ब्राजील कहा जाने लगा था। लेकिन आज आलम यह है कि एशियाड और एशियाई फुटबॉल चैंपियनशिप में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो रहा। खेल का स्तर, फुटबॉल फेडरेशन और उसकी अधिकतर सदस्य इकाइयों का स्तर और कोचिंग का स्तर इतना गिर चुका है कि हमारी महिला और पुरुष टीमें लगातार अपयश बटोर रही हैं। पुरुष टीम का हाल यह है कि उसे बांग्लादेश और नेपाल जैसे देश पीटने का माद्दा रखते हैं। भले ही जापानी महिलाएं पारंगत है लेकिन भारत को 11 गोल से पीटने का दर्द देश के फुटबॉल प्रेमियों को कचोटता है।

   इसमें कोई दो राय नहीं है कि एआईएफएफ अपने स्तर पर प्रयास कर रही है लेकिन उससे पूछा जा रहा है कि संतोष ट्रॉफी की अवहेलना कर आईएसएल और आई लीग जैसे बोझिल आयोजनों को सिर चढ़ाना कहां तक ठीक है? पूर्व खिलाड़ियों की राय में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने से अच्छे खिलाड़ी मिलेंगे। विदेशी कोचों की नियुक्ति से भी कोई फायदा नहीं हुआ। बेहतर होगा कि सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर स्तर पर अपने कोच आजमाए जाएं। लेकिन सिफारिशी, जुगाड़ू और फर्जी सर्टिफिकेट वाले कोचों, मैच फिक्सिंग से जुड़े खिलाड़ियों और क्लबों को खोज कर कठोर दंड दिया जाना भी जरूरी है। खासकर, जो राज्य संघ सट्टेबाजी, फिक्सिंग और लूट-खसोट में लिप्त हैं उनके उच्च अधिकारियों और उनके मुंह लगे क्लबों को लतियाने और कठोर दंड देने का वक्त आ गया है। वरना भारतीय फुटबॉल की वापसी शायद ही हो पाए!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *