भारत रत्न थे प्रो. मल्होत्रा!
- सांसद, खेल प्रशासक और शिक्षाविद प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने से भारतीय जनता पार्टी की वाह-वाही हुई है
- वह एक सुलझे और शांत राजनेता थे, उनकी उपलब्धियों और योगदान को देश के खेल और खिलाड़ियों ने भी बार-बार सराहा
- प्रो. मल्होत्रा भारतीय तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष रहे और आईओए के शीर्ष पद को सुशोभित किया और उन्हें एक पाक-साफ नेता और खेल प्रशासक के रूप में जाना पहचाना गया
- वह 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति के महत्वपूर्ण पदों पर थे और तमाम आयोजक भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए, प्रो. मल्होत्रा पर पर कोई उंगली नहीं उठी
राजेंद्र सजवान
देश के जाने-माने राजनेता, सांसद, खेल प्रशासक और शिक्षाविद प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने से न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की वाह-वाही हुई है अपितु खेल जगत ने भी देश की सरकार के फैसले का स्वागत किया है। चहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रो. मल्होत्रा एक सुलझे और शांत राजनेता थे, उनकी उपलब्धियों और योगदान को देश के खेल और खिलाड़ियों ने भी बार-बार सराहा।

निष्पक्ष और बेदाग छवि के धनी प्रो. मल्होत्रा ने जहां एक ओर अपनी पार्टी और जनसंघ को सुदृढ़ बनाने में बड़े काम किए तो साथ ही भारतीय खेलों और खेल फेडरेशनों में उनके योगदान की चौतरफा प्रशंसा होती रही है। भले ही वर्षों तक भारतीय तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष रहे, आईओए के शीर्ष पद को सुशोभित किया लेकिन वे आम नेता-सासंदों और राजनेताओं से हट कर थे। मीडिया से उन्होंने हमेशा नजदीकियां बनाए रखीं, जिसका उन्हें भरपूर समर्थन भी मिलता रहा। साल में दो-चार बार पत्रकारों को चांदनी चौक की प्रचलित और स्वादिष्ट पकवान, मिठाइयां खिलाते थे। यह सब इंतजाम उनके घर पर होता था, जिसमें आज के दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा की हिस्सेदारी बढ़-चढ़कर रहती थी। इसलिए क्योंकि सचदेवा उनके मीडिया प्रभारी, सबसे विश्वासपात्र और पुत्र समान थे।

सचदेवा मानते हैं कि वे आधुनिक दिल्ली के शिल्पकार तो थे ही साथ ही एक बेहद उपेक्षित खेल ‘तीरंदाजी’ को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाने और ओलम्पिक तक पहुंचाने में उनका योगदान बढ़-चढ़कर रहा। सच तो यह है कि उनका कोई विरोधी नहीं था। आईओए अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और राजा रणधीर सिंह ने उन्हें हमेशा भरपूर सम्मान दिया। यही कारण है कि वे भारतीय खेलों के उच्च पदों पर रहे लेकिन उन्हें एक पाक-साफ नेता और खेल प्रशासक के रूप में जाना पहचाना गया। उस समय भी जब वह 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति के महत्वपूर्ण पदों पर थे और तमाम आयोजक भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए, प्रो. मल्होत्रा पर पर कोई उंगली नहीं उठी। यही कारण है कि राजनीति और खेल जगत में उनका कोई विरोधी और आलोचक नहीं था। यदि उन्हें भारत रत्न दिया जाता तो शायद ही किसी को ऐतराज होता।
“मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि बतौर खेल पत्रकार लगभग तीन-चार दशकों तक आईओए और भारतीय तीरंदाजी को कवर करने का अवसर मिला और प्रो. मल्होत्रा को करीब से देखने पर पाया कि वे वाकई ‘भारत रत्न’ थे।”
