April 6, 2026

sajwansports

sajwansports पर पड़े latest sports news, India vs England test series news, local sports and special featured clean bold article.

मैराथन की बाढ़: भारत कहां खड़ा है?

  • देश के अब तक के श्रेष्ठ मैराथन धावक शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड उन्हें मुंह चिढ़ा रहा है
  • 1978 में शिवनाथ ने जालंधर में 2 घंटे 12 मिनट (02:12:00) में मैराथन दौड़ पूरी कर जो करिश्मा किया था
  • 2015 में बीजिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान ओपी जैशा ने 2 घंटे 34 मिनट 43 सेकेंड (02:34:43) का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था
  • केन्या के केल्विन किप्टुम का विश्व रिकॉर्ड 2 घंटे 35 सेकेंड (02:00:35) और महिलाओं में इथोपिया की टिगिस्ट असेफा का रिकॉर्ड 2 घंटे 11 मिनट 55 सेकेंड (02:11:53) है

राजेंद्र सजवान

भले ही अंतरराष्ट्रीय मैराथन में भारतीय धावक कहीं उल्लेखनीय करते नजर नहीं आते हैं लेकिन डेढ़ अरब की आबादी वाले हमारे देश में मैराथन दौड़ों के आयोजन का चलन और संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि इन दौड़ों के आयोजन का औचित्य क्या रह जाता है? क्या फिटनेस के लिए ऐसे आयोजन होते हैं या आयोजकों का उद्देश्य कुछ और होता है? आयोजकों से पूछेंगे तो उनका जवाब होता है कि उनका मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को सड़क पर उतार कर उन्हें फिट रहने का संदेश देना है। सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि बच्चे, बुजुर्ग, महिला-पुरुष और सैकड़ों-हजारों विदेशी धावक भी इन दौड़ों का आनंद उठाते हैं लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि मैराथन दौड़ों में भारतीय एथलीट कहां खड़े हैं? ओलम्पिक और विश्व स्तर पर कितने पदक जीतने में सफल रहे हैं?

   बेशक, इन सवालों के जवाब आयोजकों, औद्योगिक घरानों, बड़ी कंपनियों और पेशेवर लोगों के पास नहीं है। शायद उन्हें यह भी याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि देश के अब तक के श्रेष्ठ मैराथन धावक शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड उन्हें मुंह चिढ़ा रहा है। 1978 में शिवनाथ ने जालंधर में 2 घंटे 12 मिनट (02:12:00) में मैराथन दौड़ पूरी कर जो करिश्मा किया था उसे आज तक कोई भी भारतीय तोड़ नहीं पाया है। जहां तक महिलाओं की बात है तो 2015 में बीजिंग में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान ओपी जैशा ने 2 घंटे 34 मिनट 43 सेकेंड (02:34:43) का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। शिवनाथ का प्रदर्शन लंबे समय तक चलने वाला भारतीय रिकॉर्ड है।   

   यूं तो भारत में रोज कोई न कोई दौड़ आयोजित की जाती है लेकिन नई दिल्ली मैराथन, टाटा मुम्बई मैराथन, पुणे इंटरनेशनल मैराथन, हैदराबाद मैराथन, जयपुर मैराथन, कोलकाता मैराथन, लद्दाख मैराथन, ओरोविल मैराथन, ताजमहल मैराथन और दर्जनों अन्य फुल एवं हाफ मैराथन सालों से आयोजित की जा रही हैं। लेकिन भारतीय प्रदर्शन में कोई सुधार नजर नहीं आता। मैराथन संस्कृति जिस तेजी से फैल रही है लेकिन प्रदर्शनों में सुधार कहीं नजर नहीं आता। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि आयोजकों-प्रायोजकों का असली मकसद क्या है?

   केन्या के केल्विन किप्टुम का विश्व रिकॉर्ड 2 घंटे 35 सेकेंड (02:00:35) और महिलाओं में इथोपिया की टिगिस्ट असेफा का रिकॉर्ड 2 घंटे 11 मिनट 55 सेकेंड (02:11:53) है जो कि लगातार सुधर रहा है। अर्थात् भारतीय धावक अभी सालों पीछे दौड़ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *