हर डाल पे रेपिस्ट बैठा है!
राजेंद्र सजवान
खेल महाशक्ति बनने की दिशा में तेज रफ़्तार से दौड़ रहे भारत महान की एक और उभरती खिलाड़ी रेपिस्ट गुरु की शिकार हो गई है। निशानेबाजी के कोच ने अपनी शिष्या को जबरन शिकार बनाया और गुरु शिष्य रिश्तों को तार-तार कर दिया। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। देश के खेल प्रेमी और निशानेबाजी से जुड़े खिलाड़ी और अधिकारी यह भी जानते हैं कि कुछ साल पहले कैसे एक नामी कोच ने जानी-मानी ओलम्पियन से अश्लील हरकतें की थीं। भले ही बाद में दोनों पक्षो में सुलह हो गई थी। लेकिन ताज़ा घटनाक्रम से एक बात साफ हो गई है कि भारतीय खेलों में कोई भी महिला खिलाड़ी सुरक्षित नहीं है। हां यह बात अलग है कि वह कोच और फेडरेशन अधिकारियों के विरुद्ध बगावत कर सक़ती है लेकिन उसका खेल करियर तबाह होना तय है।

कुछ साल पहले एक महिला हॉकी खिलाड़ी ने राष्ट्रीय टीम के कोच के विरुद्ध आवाज़ उठाई तो उसे फेडरेशन (हॉकी इंडिया) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के उच्च अधिकारियों द्वारा पड़ताड़ित किया गया और उसने हथियार डालना ही बेहतर समझा। फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक, जिम्नास्टिक, तैराकी, जूडो, तायक्वाडो, वॉलीबॉल, फुटबॉल, कुश्ती, क्रिकेट, हैंडबॉल और तमाम खेलों में आरोप-प्रत्यारोपों की लम्बी लिस्ट है। लेकिन तारीफ़ की बात यह है कि देश का खेल मंत्रालय, आईओए और खेल संघो ने अपराधियों को हमेशा बचाने और छुपाने का काम किया। बेटी बचाओ का नारा देने वाली झूठी सरकारों ने अपनी गंदी राजनीति का खेल खेल कर महिला खिलाड़ियों का मानमर्दन होते देखा और आँख फेर ली। नतीजन अपराधियों के हौसलों को बल मिला और एक जानकारी के अनुसार रोज कोई ना कोई महिला खिलाड़ी दरिंदगी की शिकार हो रही है। अर्थात हर डाल पे उल्लू बैठा है।
महिला खिलाड़ियों के साथ यौनाचार ऐसे बहुत से मामले खेल मंत्रालय, खेल प्राधिकरण, खेल महासंघों और कोर्ट-कचहरी की फाइलों में दम तोड़ रहे हैं जिनमे साक्ष्य होने के बावजूद दोषियों को बचा लिया गया। अपराधी अपनी ऊँची पहुँच का फायदा उठा कर पलट वार कर रहे हैं तो बहुत सी महिला खिलाड़ी अपनी और परिवार की इज्जत के बारे में सोच कर मौन हो जाती हैँ। मामला गंभीर है। नशाखोरी और चरित्रहीनता भारतीय खेलों का चरित्र बन चुके हैं। नतीजन कुछ खिलाड़ी समय से पहले खेल मैदान से दूर हो रही हैं तो कुछ एक को हालात के साथ समझौता करना पड़ रहा है। और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
