दिल्ली का चैंपियन: गढ़वाल हीरोज एंड कंपनी
- गढ़वाल हीरोज फुटबॉल क्लब ने दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 का खिताब जीता
- इसके साथ ही गढ़वाल हीरोज छठी बार दिल्ली की चैंपियन बना
राजेंद्र सजवान
गढ़वाल हीरोज फुटबॉल क्लब ने दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 का खिताब जीत कर यह साबित कर दिया है कि दिल्ली और देश की फुटबॉल में उसकी कामयाबी का ग्राफ लगातार ऊँचा उठ रहा है। भले ही कमान अब बाईचुंग भूटिया एन्ड कंपनी ने थाम ली है लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि उत्तराखंडी मूल के पदाधिकारियों और खिलाड़ियों की एकजुटता का प्रतीक यह क्लब वर्षों से प्रदेश के गढ़वाली और कुमाउनी समाज की फुटबॉल श्रेष्ठता को बनाए हुए है। गढ़वाल हीरोज ने छठी बार ख़िताब जीत कर एक ऐसा रिकार्ड बनाया है जिसके आस पास पहुँचने में भी राजधानी के किसी क्लब को सालों लग जाएंगे।

फुटबॉल प्रेमी जानते ही हैं कि गढ़वाल हीरोज पिछले छह दशकों से राजधानी की फुटबॉल में एक बड़ा नाम है, जिसने 1960-70 के दशक में दिल्ली फुटबॉल एसोसिएशन में एक मान्यता प्राप्त क्लब के रूप में प्रवेश पाया और साल दर साल स्थानीय फुटबॉल पर पकड़ बनाते हुए ढेरों ख़िताब जीते। क्लब को ऊँचाइयाँ पाने में समय जरूर लगा लेकिन आज गढ़वाल हीरोज देश के प्रमुख क्लबों में शुमार है और छठी बार स्थानीय लीग का चैंपियन बनकर उस मुकाम को पाने में सफल रहा है जो कि बंगाल की फुटबॉल में कोलकाता के मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे चैंपियन क्लबों को प्राप्त है। अपनी उपलब्धियों के दम पर कल का गढ़वाल हीरोज अब गढ़वाल हीरोज एंड कंपनी बनकर मज़बूत कदम बढ़ा रहा है।

गढ़वाल हीरोज कैसे चैंपियन हीरोज बना? कौन लोग हैं जिन्होंने दिल्ली की फुटबॉल में उत्तराखंड का बीजारोपण कर नाम सम्मान कमाया, इस बारे में बहुत कम फुटबॉल प्रेमी जानते हैं। क्लब से शुरुआती वर्षों से जुड़े और शीर्ष पदों पर रहे मगन सिँह पटवाल दिल्ली और देश की फुटबॉल में बहुचर्चित चेहरा हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया, “स्वर्गीय केसर सिँह नेगी क्लब के संस्थापक थे। अन्य सदस्यों में हयात सिँह भंडारी, रंजीत रावत, त्रिभुवन रावत, उमेद सिँह, दुर्गेश थपलियाल, सुखपाल बिष्ट, विजय राम ध्यानी, भगत सिंह नेगी, कीरत रावत, अनिल नेगी, भगवान सिँह नेगी, रतन रावत आदि शामिल हैं। क्लब को चैंपियन बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों में जगदीश रावत, गुमान रावत, जीव आनंद, प्रकाश नवानी, यशपाल असवाल, भीम भंडारी, हरेंद्र नेगी, कुलदीप, रविन्द्र रावत, कमल जदली, वीरेन्द रावत, लक्मण बिष्ट, भारत नेगी, राजेंद्र बर्थवाल, कमई राधा बल्लभ, रघुवीर बिष्ट, हरेंद्र बिष्ट, वीरेंद्र मालकोटी, रामा सुब्रमण्यम, गोपी, कन्हैया, रवि राणा, रुबिन सतीश, माधवा नन्द, सजीव भल्ला, किशन, राजेंद्र दाणी, दिगंबर, विपिंन भट्ट, हितेंद्र रावत गोल्डी, कुलभूषण मनराल, त्रिलोक बिष्ट, कमल रावत, आशीष पांडे, गुरमीत, राहुल असवाल, राकेश रावत, मनोज गोसाईं, अनिल पटवाल और स्वयं लेखक (राजेंद्र सजवान) सहित दर्जनों अन्य बड़े नाम शामिल रहे हैं।”

इसमें दो राय नहीं कि गढ़वाल हीरोज की पहचान सबसे ज्यादा अनुशासित और निर्विवाद श्रेष्ठ क्लब की रही है। यही कारण है कि जहाँ एक तरफ तमाम पुराने नामी क्लब अपना अस्तित्व खो रहे है तो गढ़वाल हीरोज साल दर साल अपनी पहचान को चार चाँद लगा रहा है।
