हॉकी में घमासान क्यों मचा है?
- दो बार ओलम्पिक कांस्य जीतने वाले मनप्रीत संभावित भारतीय खिलाड़ियों की सूची से बाहर‘ इस खबर से भारतीय हॉकी में जैसे हड़कंप सा मच गया है
- जाने-माने पूर्व खिलाड़ी, कोच, हॉकी प्रेमी और मनप्रीत के चाहने वाले देश में हॉकी इंडिया और उसकी चयन समिति के फैसले से नाखुश हैं
- हॉकी पंडित को लगता है कि 33 वर्षीय स्टार खिलाड़ी मनप्रीत पिछले 15 सालों में देश के लिए कई मोर्चा पर भरोसेमंद साबित हो चुका है
- यदि उसे टीम में स्थान मिल जाता है तो पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की का 412 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड तोड़ देगा जिससे मात्र एक मैच की दूरी पर है
राजेंद्र सजवान
‘स्टार खिलाड़ी मनप्रीत संभावित भारतीय खिलाड़ियों की सूची से बाहर’ इस खबर से भारतीय हॉकी में जैसे हड़कंप सा मच गया है। जाने-माने पूर्व खिलाड़ी, कोच, हॉकी प्रेमी और मनप्रीत के चाहने वाले देश में हॉकी को संचालित करने वाली हॉकी इंडिया और उसकी चयन समिति के फैसले से नाखुश हैं। हॉकी इंडिया लीग के बाद घोषित संभावित खिलाड़ियों में हालंकि कई नई चेहरे भी शामिल हैं लेकिन मनप्रीत बहुचर्चित नाम है। दो बार ओलम्पिक कांस्य जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल रहे इस खिलाड़ी ने हालांकि अपने खेल से प्रभावित किया है लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि उसे टीम से बेदखल करने के पीछे कोई बड़ी साजिश है।

कुछ हॉकी पंडित और मनप्रीत के मन को समझने वालों को लगता है कि 33 वर्षीय खिलाड़ी पिछले 15 सालों में देश के लिए कई मोर्चा पर भरोसेमंद साबित हो चुका है। यदि उसे टीम में स्थान मिल जाता है तो पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की का 412 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड तोड़ देगा जिससे मात्र एक मैच की दूरी पर है। लेकिन तर्क दिया जा रहा है कि क्योंकि अगस्त में वर्ल्ड कप और अक्टूबर में एशियाई खेलों में भाग लेना है इसलिए कुछ नए खिलाड़ियों को आजमाया जा रहा है।

सवाल यह पैदा होता है कि साजिश कौन कर रहा है और किस लिए? यदि ऐसा हॉकी इंडिया के शीर्ष के इशारे पर हो रहा है तो बेहद दुखद है। यह ना भूलें कि भारतीय हॉकी अपनी वापसी के लिए प्रयासरत है। 1980 के मॉस्को ओलम्पिक के बाद से ओलम्पिक गोल्ड जीतने का सपना बार-बार टूटता आया है। वर्ल्ड कप 1975 में पहली और आखिरी बार जीता था और उसके बाद साजिश, दावों और आरोप-प्रत्यारोपों में फंस कर रह गए। हालांकि अब भी हम पहले चार देशों में शामिल नहीं हैं। पिछले बड़े आयोजन में भी नौवें स्थान पर ठिठक गए थे। ऐसी हालत में एक प्रमुख खिलाड़ी को लेकर चल रही राजनीति से भारतीय हॉकी को क्या कीमत चुकानी पड़ेगी यह तो वक्त ही बताएगा।

