महज खानापूर्ति है डीएसए सीनियर डिवीजन लीग
- दिल्ली प्रीमियर लीग की तरह ही सीनियर डिवीजन लीग में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है
- खाली खाली स्टेडियम में खेले जा रहे मैच केवल खानापूर्ति नजर आते हैं
राजेंद्र सजवान
डीएसए सीनियर डिवीजन लीग अबतक आधा सफर भी तय नहीं कर पाई है लेकिन प्रोमोट होने वाली और ए डिवीजन में लुढ़कने वाली टीमों की धुंधली सी तस्वीर नजर आने लगी है। फिलहाल, नेशनल यूनाइटेड स्पोर्ट्स क्लब अब तक खेले गए सभी चार मुकाबले जीतकर 12 अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है। दूसरे नंबर पर चल रहे गढ़वाल डायमंड ने भी कोई मैच नहीं हारा है। डायमंड की टीम ने दो जीते हैं और दो ड्रा से आठ अंक जुटाए हैं। तीसरे नंबर पर हिंदुस्तान एफसी और चौथे नंबर पर वायुसेना पालम की टीमें हैं, जिनके क्रमश: सात और छह अंक हैं। पांच-पांच अंकों के साथ सिटी एफसी और यूनाइटेड भारत पांचवें व छठे नंबर पर चल रहे हैं।

डीएसए के अनुसार, पहले छह स्थानों पर रहने वाली टीमों के बीच सुपर सिक्स लीग आयोजित की जाएगी जिसमें से प्रथम तीन स्थान पर रहने वाली टीमें प्रीमियर लीग में खेलने की हकदार होंगी। अंतिम पांच टीमों के बीच रेलीगेशन मुकाबले आयोजित होंगे और निचले दो स्थानों पर रहने वाले क्लब रेलीगेट होकर ए डिवीजन में जा गिरेंगे। अब तक खेले गए मैचों के आधार पर अजमल एफसी और शास्त्री एफसी ने चार-चार अंक जुटाए हैं। उत्तराखंड एफसी के दो और जगुआर का एक अंक है। दिल्ली टाइगर्स ऐसा क्लब है जिसने चारों मैच हारकर खाता भी नहीं खोला है। हालांकि अभी से किसी भी प्रकार का दावा करना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों ने आगे के मैचों को गंभीरता से नहीं लिया तो जगुआर और दिल्ली टाइगर्स के लिए सीनियर डिवीजन लीग में बने रहना भारी पड़ सकता है। अजमल, शास्त्री और उत्तराखंड के लिए भी आने वाले मुकाबले चुनौती पूर्ण रहेंगे।

अबतक खेले गए मैचों के नतीजों, खिलाड़ियों के प्रदर्शन क्लब अधिकारियों के बर्ताव और रेफरियों के फैसले पर सरसरी नजरें डालें तो कुछ एक मुकाबलों में खेल का स्तर स्कूली खिलाड़ियों से भी बदतर रहा है। रेफरियों को कोसने का सिलसिला लगातार जारी है। दिल्ली प्रीमियर लीग की तरह ही सीनियर डिवीजन लीग में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। खाली खाली स्टेडियम में खेले जा रहे मैच केवल खानापूर्ति नजर आते हैं।
