एशियाड सिर पर:फिर भिड़े हॉकी के सांड!
- अध्यक्ष दिलीप टिर्की और महासचिव पहलवान भोला नाथ सिंह के बीच मलयुद्ध जैसा माहौल था लेकिन अब महनिदेशक आर.के. श्रीवास्तव को भी इस दंगल में घसीट लिया गया है
राजेंद्र सजवान
हालांकि हॉकी इंडिया फिर से नीले रंग पर लौट आई है लेकिन विवाद हैं कि कम होने का नाम नहीं ले रहे। लम्बे समय से अध्यक्ष दिलीप टिर्की और महासचिव पहलवान भोला नाथ सिंह के बीच मलयुद्ध जैसा माहौल था लेकिन अब महनिदेशक आर.के. श्रीवास्तव को भी दंगल में घसीट लिया गया है। उन्हें बेइज्जत कर तमाम अधिकार छीन कर विवाद में घसीट लिया गया है। यह बवाल तब मचा है जबकि एशियाई खेलों के लिए मात्र सप्ताह भर का समय बचा है।

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने वर्ल्ड कप में कौन से तीर चलाए आप सब के सामने है। महिलाएं पांचवें स्थान पर और पुरुष आठवें पर रहे। बेशक, हम अंतिम पर नहीं आए, बस यही संतोषजनक कहा जा सकता है। जहाँ तक आम हॉकी प्रेमी की बात है तो वह मनमसोज कर रह सकता है और अगली बार कप जीतने के झूठे ख्वाब दिखाने वालों के झांसे में आ सकता है। लेकिन हमेशा की तरह एक बार फिर खराब प्रदर्शन को लेकर आरोप-प्रत्यरोपों और लात-घूसों के साथ मातमी धुन बज रही है।

कुछ दिन पहले तक हॉकी इंडिया और खिलाड़ियों के घड़ियाली आंसू पोंछे जा रहे थे और उन्हें अगली बार तैयार रहने के लिए कहा जा रहा था लेकिन अधिकारियों के पाप धुलने अभी बाकी थे कि एक और हंगामा खड़ा हो गया। दो सांडों के बीच अब डीजी श्रीवास्तव की पिसाई हो रही है। सीधा सा मतलब है कि भारतीय हॉकी ने बर्बाद होने की ठानी है। खिलाड़ियों से मैदान नहीं संभल पा रहा तो हॉकी इंडिया ने निर्लजता की सारी हदें पार कर दी है। उस समय जबकि महिला और पुरुष टीमों के सामने एशियाड जीत कर सीधे ओलंपिक खेलने का मौका है हॉकी इंडिया के बड़े घटिया हरकतों पर उतर आए हैं। हैरानी वाली बात यह है कि बड़ी बड़ी बातें करने वाले खेल मंत्रालय से कुछ करते नहीं बन पा रहा। खिलाड़ी, हॉकी प्रेमी और हॉकी के माई बाप मूक दर्शक बने हुए हैं। ऐसे में दो-तीन सांडों की लड़ाई में हॉकी का कुचला जाना तय लगता है।
