May 28, 2026

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शाबाश गुरिंदर, लेकिन मंजिल दूर है!

  • पंजाब के 26 वर्षीय चैंपियन ने नेशनल सीनियर फेडरेशन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर फर्राटा दौड़ 10.09 सेकंड के नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड समय में जीता
  • 100 मीटर का वर्ल्ड रिकॉर्ड 9.58 सेकंड और ओलम्पिक रिकॉर्ड 9.63 सेकंड के साथ जमैका के उसैन बोल्ट के नाम है
  • कब कोई भारतीय ओलम्पिक और विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतेगा, यह सवाल जस का तस खड़ा है
  • ठीक उसी प्रकार जैसे मिल्खा सिंह और पीटी उषा पदक के एकदम करीब पहुंचने के बाद चूक गए थे

राजेंद्र सजवान

पंजाब के गुरिंदर वीर सिंह ने नेशनल सीनियर फेडरेशन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर फर्राटा दौड़ 10.09 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड समय में जीतकर एशियाड और कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने और भारतीय कीर्तिमान को बेहतर करने की उम्मीद जतलाई है। 26 वर्षीय चैंपियन के पास अभी उम्र और जोश के साथ कुछ और मुकाम पाने का अवसर है। जहां तक कुल भारतीय प्रदर्शन की बात है तो दूसरे स्थान पर रहे अनिमेष कुजूर उसके साथ लगातार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और 10.18 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर हैं। लेकिन कब कोई भारतीय ओलम्पिक और विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतेगा, यह सवाल जस का तस खड़ा है। ठीक उसी प्रकार जैसे मिल्खा सिंह और पीटी उषा पदक के एकदम करीब पहुंचने के बाद चूक गए थे।

   जहां तक 100 मीटर के रिकॉर्ड की बात है तो जमैका के उसैन बोल्ट क्रमश: 9.58 सेकंड और 9.63 सेकंड के अभूतपूर्व प्रदर्शन के साथ क्रमश: विश्व और ओलम्पिक रिकॉर्ड को बचाए हुए हैं। पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक सालों से कोई भी पुरुष फर्राटा धावक उसैन बोल्ट के आस-पास नहीं पहुंच पाया है। जहां तक महिलाओं की बात है तो उन्हें ओलम्पिक पदक जीतने के लिए अभी सालों का इंतजार करना पड़ सकता है।

   उसैन बोल्ट ने 100 मीटर में लगातार तीन गोल्ड जीत कर खुद को इतिहास का सर्वश्रेष्ठ और सबसे तेज धावक साबित किया था। जहां तक भारत की बात है तो नीरज चोपड़ा ऐसे एथलीट हैं, जिसने इकलौता ओलम्पिक गोल्ड जीता है। लेकिन ट्रैक स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों के लिए पहला ओलम्पिक या विश्व स्तरीय पदक जीतना आसान नहीं होगा। अमेरिका, जमैका, केन्या और कुछ अन्य देश ट्रैक पर कोहराम मचाते हुए हैं। हालांकि गुरिंदर कहा है कि उसका श्रेष्ठ आना अभी बाकी है लेकिन जहां सेकंड के सौवें हिस्से का भी महत्व होता है पदक निकालना चमत्कार होगा। लेकिन उसके हौसले बुलंद हैं। जरूरत इस बात की है कि अति उत्साह से बचे। इसके बाद एक-एक कदम बेहद भारी होगा। खासकर, हवा में चढ़ाने वाले धड़ाम से गिराने वाले नाकारा भारतीय मीडिया से बच कर रहे। हो सके तो नीरज चोपड़ा की शरण में जाए और शालीनता के साथ बढ़ने के गुर सीखें।

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