दीदी को फुटबॉल: लगता है खेला हो कर रहेगा!
- पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में चूंकि दो फाड़, तीन फाड़ और शायद फाड़म-फाड़ हो गई है और पार्टी का हाल भारतीय फुटबॉल जैसा हो गया है, जिसे चौतरफ़ा लात पड़ रही है
- आज भारतीय फुटबॉल की हालत खस्ता है ठीक वैसे ही जैसे कि तृणमूल सत्ता के खेल में पीछे छूट गई है, जिसका अस्तित्व चुनाव आयोग ने लगभग समाप्त कर दिया है और उसे चुनाव चिन्ह के रूप में फुटबॉल थमा दी है
- भारतीय फुटबॉल पर कुंडली मारकर बैठे कल्याण चौबे फिलहाल हर मोर्चे पर नाकाम रहे हैं लेकिन दीदी के लिए फुटबॉल चमत्कारी साबित हुई तो फिर से खेला कर सकती हैं
राजेंद्र सजवान
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव आयोग ने फुटबॉल थमा दी है। उनकी पार्टी में चूंकि दो फाड़, तीन फाड़ और शायद फाड़म-फाड़ हो गई है इसलिए उन्हें फुटबॉल सिर्फ खेलने के लिए नहीं दी गई है। शायद उन्हें कहा जा रहा है कि आपकी पार्टी का हाल भारतीय फुटबॉल जैसा हो गया है, जिसे चौतरफ़ा लात पड़ रही है।

चुनाव आयोग ने पता नहीं किस नीयत से ममता की छिन्न-भिन्न हुई पार्टी को फुटबॉल दी है लेकिन इसमें दो राय नहीं की ममता दीदी की फुटबॉल की हालत भारतीय फुटबॉल से मेल खाती है, जिसे हर कोई ऐरा-गैरा लतिया रहा है। वैसे भी फुटबॉल बंगाल का पहला और सबसे लोकप्रिय खेल है जिसने देश को दर्जनों खिलाड़ी दिए हैं। यह बात और है कि आज भारतीय फुटबॉल की हालत खस्ता है ठीक वैसे ही जैसे कि तृणमूल सत्ता के खेल में पीछे छूट गई है, जिसका अस्तित्व चुनाव आयोग ने लगभग समाप्त कर दिया है।
हालांकि भारतीय फुटबॉल के पनपने और फिर से ट्रैक पर आने की उम्मीद कम है लेकिन चूंकि दीदी के हिस्से फुटबॉल आई है इसलिए अब उन्हें टूटी-बिखरी पार्टी के साथ साथ फुटबॉल का भी भला करना है। लेकिन उनके चुनाव चिन्ह पर कल्याण चौबे कुंडली मार कर बैठा हैं, जिसके अध्यक्ष रहते भारत में फुटबॉल की पूरी हवा निकल चुकी है। अब देखने लायक बात यह होगी कि कौन पहले फुटबॉल को जीवंत करता है। कल्याण चौबे तो फिलहाल हर मोर्चे पर नाकाम रहे हैं लेकिन दीदी के लिए फुटबॉल चमत्कारी साबित हुई तो फिर से खेला कर सकती हैं।

