लानत है ऐसी फुटबॉल पर…
- एआईएफएफ लगातार विदेशी मूल के भारतीय फुटबॉलरों को खोज रही है, उनसे संपर्क किया जा रहा है
- रेयान विलियम्स को भारतीय नागरिकता देने के बाद राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनाया जा चुका है
- अब कहा जा रहा है कि तीन अन्य विदेशी खिलाड़ी भारतीय फुटबॉल का हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल उनके नाम तय नहीं हैं
- यदि यह खबर सही है तो यह मान लेना चाहिए कि भारतीय फुटबॉल का तमाम सिस्टम तबाह हो चुका है
- फेडरेशन का दिवाला निकल गया है और देश में दमखम वाले मजबूत कद काठी वाले और दिल दिमाग के स्वस्थ युवाओं का अकाल पड़ गया है
- इसलिए विदेशों से ‘मेड इन इंडिया’ की फर्जी स्टैंप वाले फुटबॉलर आयात करने पड़ रहे हैं।
राजेंद्र सजवान
इतिहास गवाह है कि कुछ देशों ने जनसंख्या बढ़ाने, लैंगिक असंतुलन सुधारने और श्रम की कमी पूरी करने के लिए बड़ी संख्या में विदेशी पुरुषों को बुलाया-बसाया था। खासकर, 19वीं-20वीं सदी में ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने यूरोप और चीन के श्रमिकों को बुलाया। ब्राजील और अर्जेंटीना और नाजी जर्मनी में भी ‘आर्य नस्ल’ को बढ़ावा देने के लिए कुछ ऐसे प्रयोग किए गए जिन्हें सबसे कुख्यात और अमानवीय कार्यक्रमों में गिना जाता है। ऐसे भी उदाहरण है, जब कुछ देशों ने अपनी भावी पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक तौर पर बलिष्ठ बनाने के लिए विदेशी युवाओं को आमंत्रित किया।

इतिहास में जाने की बजाय मूल विषय की तरफ बढ़ते हैं। पता चला है कि भारतीय फुटबॉल में कुछ क्रांतिकारी होने जा रहा है। हालांकि शुरुआत कुछ सप्ताह पहले हो चुकी थी, रेयान विलियम्स को भारतीय नागरिकता देने के बाद राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनाया गया था। अब कहा जा रहा है कि तीन अन्य विदेशी खिलाड़ी भारतीय फुटबॉल का हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल उनके नाम तय नहीं हैं लेकिन अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) लगातार ऐसे खिलाड़ियों को खोज रही है, उनसे संपर्क किया जा रहा है।

कुछ पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का मानना है, “यदि यह खबर सही है तो यह मान लेना चाहिए कि भारतीय फुटबॉल का तमाम सिस्टम तबाह हो चुका है, फेडरेशन का दिवाला निकल गया है और देश में दमखम वाले मजबूत कद काठी वाले और दिल दिमाग के स्वस्थ युवाओं का अकाल पड़ गया है। ऐसे में विदेशों से ‘मेड इन इंडिया’ की फर्जी स्टैंप वाले फुटबॉलर आयात करने पड़ रहे हैं।” साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि भारतीय फुटबॉल को बर्बाद करने वाले नाकारा और भ्रष्ट लोग ‘भारतीय मूल के विदेशी’ का नारा उछाल कर देश का मान-सम्मान गिरा रहे हैं। दुनिया को संदेश दिया जा रहा है कि भारतीय दिमाग और पैरों में ताकत नहीं रही है। शर्मनाक यह है कि 150 करोड़ की आबादी वाले देश की नजरें 30 ऐसे विदेशियों पर है, जो भारतीय मूल के बताए जा रहे हैं। अर्थात् करोड़ों युवाओं के देश में 11 ऐसे खिलाड़ी भी नहीं है, जो भारतीय फुटबॉल का मान-सम्मान बचा सकें। दूसरी तरफ देश में फुटबॉल को चाहने वाला एक वर्ग कह रहा है कि जिस खेल में देश का सम्मान बचाने का माद्दा नहीं है उसकी युवा शक्ति को धिक्कार है। यह न भूलें कि कुछ एक लाख की आबादी वाले देश फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं।
