बीएफआई असंतुष्ट बोले, अजय सिंह भारतीय मुक्केबाजी को कर रहे हैं बर्बाद
- बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ महासचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है
- बीएफआई की कुल 35 में से 27 इकाइयों ने उपस्थिति दर्ज कर बगावत का बिगुल बजा हुए अध्यक्ष पर रक्षक से भक्षक बनने का आरोप लगाया
राजेंद्र सजवान
“जिस मुक्केबाजी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश को मान सम्मान दिया, पदक दिलाए उसी का मुखिया निहित स्वार्थो के चलते अपने ही खेल को बर्बाद करने पर तुला है। श्रीमान जी ने भारतीय मुक्केबाजी फेडरेशन (बीएफआई) को मखौल का पात्र बना दिया है।” फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश भंडारी और महासचिव प्रमोद कुमार की अगुवाई में बुधवार को राजधानी दिल्ली में असंतुष्टों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए अपने अध्यक्ष अजय सिंह पर मनमानी करने और संविधान का मखौल उड़ाने का आरोप लगाते हुए ऐसा कहा।
राजेश भंडारी की अगुआई में आज यहां तीन चौथाई से ज्यादा इकाइयों के अध्यक्ष एवं सचिव ने मीडिया के सामने अपने खेल के साथ हो रहे अन्याय को अध्यक्ष अजय सिंह की मनमानी के साथ जोड़ा और आरोप लगाया कि सचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की अध्यक्ष महोदय जरा भी नहीं सुनते। उनका जैसा मन करता है, कर गुजरते हैं। हैरानी वाली बात यह है कि अजय सिंह अपने पक्ष में संविधान के साथ छेड़छाड़ से भी नहीं डरते। जब मन चाहा अपनी सुविधा के हिसाब से निर्णय लेते हैं जिसे लेकर सभी इकाइयां और खिलाड़ी हैरान परेशान हैं।

सचिव प्रमोद कुमार, जो कि एक अच्छे एथलीट भी रह चुके हैं, मुक्केबाजी फेडरेशन प्रमुख की मनमानी से हैरान परेशान हैं और इस मामले को भारतीय ओलंपिक संघ, साई और खेल मंत्रालय के सम्मुख उठाने की बात करते हैं। उनके अनुसार, जब कभी भारतीय मुक्केबाज अच्छा प्रदर्शन करते हैं, अध्यक्ष महोदय सारा श्रेय लूट ले जाते हैं और ख़राब प्रदर्शन पर टीम के बाकी सदस्यों को बुरा भला कहते हैं। हैरानी तब होती है, जब अजय सिंह अन्य पदाधिकारियों से सलाह मशवरा किए बिना संविधान से खिलवाड़ करने चूकते नहीं हैं। प्रमोद के अनुसार, पिछले कुछ सालों से राष्ट्रीय चैंपियनशिप का विधिवत आयोजन नहीं हो पा रहा, मुक्केबाजों के चयन में मनमानी हो रही है और अपने कोचों को लगातार नकारा जा रहा है, जिसके लिए फेडरेशन अध्यक्ष जिम्मेदार हैं।
1996 से 2004 तक महासचिव पद पर रहे राजेश भंडारी ने प्रमोद कुमार की वर्किंग को सराहा और कहा कि वे समर्पित हैं लेकिन अजय सिंह को फूटी आँख नहीं भाते। इसलिए क्योंकि उनकी मनमानी का प्रमोद लगातार विरोध करते आ रहे हैं। फेडरेशन के कोषाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी अपने अध्यक्ष के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। बीएफआई की कुल 35 में से 27 इकाइयों ने उपस्थिति दर्ज कर अध्यक्ष के विरुद्ध बगावत का बिगुल बजा दिया है। लेकिन भंडारी और प्रमोद सहित तमाम सदस्य फिलहाल बातचीत से राह निकालना चाहते हैं, जो कि संभव नज़र नहीं आता। कुल मिलाकर मुक्केबाजी की लड़ाई अब कोर्ट कचहरी में ही लड़ी जाएगी, जिसके लिए अजय सिंह को जिम्मेदार माना जा रहा है।
