फुटबॉल को राष्ट्रीय खेल घोषित करें तो..!
- वाराणसी में फ़्रांस, इंग्लैंड, स्पेन, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से कुछ विदेशी पर्यटकों ने भारतीय फुटबॉल की जर्जर हालत पर अपनी राय रखी
- इन विदेशी पर्यटकों ने माना कि फुटबॉल के पतन का जिम्मेदार क्रिकेट नहीं है
राजेंद्र सजवान
हाल ही में वाराणसी दौरे पर कुछ विदेशी पर्यटकों से बातचीत का अवसर मिला। संयोग से उनमें से ज्यादातर फ़्रांस, इंग्लैंड, स्पेन, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से थे और उनकी रूचि फुटबॉल में थी। बात ही बात में उनमें से कुछ एक ने भारत के लोकप्रिय खेलों के बारे में जानना चाहा और साथ ही पूछा कि डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में फुटबॉल क्यों लोकप्रिय नहीं हो पाया? और क्यों भारत फुटबॉल नक़्शे पर नज़र नहीं आता? इससे पहले कि कोई जवाब दे पाता, फ़्रांस की एक पत्रकार ने “एक्सक्यूज़ मी” के साथ जो जवाब दिया उसे सुनकर सन्न रह गया। मैडम बोलीं, “जहाँ तक मुझे पता है भारतीय फुटबॉल देश की गरीबी, पक्षपात, उम्र की धोखाधड़ी और फुटबॉल को संचालित करने वाली फेडरेशन के भ्रष्टाचार से उबर नहीं पाई।”

इंग्लैंड के एक क्रिकेट प्रेमी ने जो दूसरा कारण बताया, वो भी काबिलेगौर कहा जा सकता है। युवा हेडेन खुद अच्छे क्रिकेटर रहे हैं और भारतीय फुटबॉल की थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं। उन्होंने क्रिकेट की अधिकता को भारतीय फुटबॉल के लिए घातक बताया। इसलिए क्योंकि फुटबॉल की असली ताकत क्रिकेट में कुर्बान हो रही है। भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों सचिन, कोहली, वैभव आदि की उन्होंने तारीफ की लेकिन साथ ही कहा कि बेवजह क्रिकेट फील्ड में बर्बाद होने वाली कई प्रतिभाएं फुटबॉल में कमाल कर सकती थीं। लेकिन उनकी काबिलियत को पहचाना नहीं गया। क्रिकेट पर बोझ बढ़ रहा है और उसी रफ़्तार से फुटबॉल में गिरावट जारी है। उनकी राय में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में यदि फुटबॉल को राष्ट्रीय खेल का दर्ज़ा घोषित किया जाए तो बदलाव अवश्य आएगा।
न्यूज़ीलैंड के एक पर्यटक ने भारतीय अखबार में छपी खबर का उल्लेख करते हुए उलट सवाल किया और पूछा कि भारत में उम्र की धोखाधड़ी, चयन में धांधली और पर्याप्त मैदानों का ना होना एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। यदि सचमुच ऐसा है तो इसे फुटबॉल का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा।

बेशक़, विदेशी पर्यटकों ने भारत में फुटबॉल के पतन की सही नब्ज़ को पकड़ा है। लेकिन क्रिकेट को बड़ा कारण नहीं मानते। ज्यादातर की राय में सरकारी हस्तक्षेप के बिना फुटबॉल की गिरावट नहीं रुकने वाली। सरकार को पता होना चाहिए कि फुटबॉल पूरी दुनिया का खेल है। जो देश फुटबॉल में आगे हैं उनकी अर्थव्यवस्था और आम नागरिक की खुशहाली पर भी प्रभाव पड़ता है। ज्यादातर की राय में फुटबॉल को यदि राष्ट्रीय खेल घोषित किया जाए और तमाम सुविधाएं दी जाएं तो तरक्की संभव है।
