रेल का खेल: आंदोलकारी पहलवानों पर मेहरबानी क्यों?

  • इसमें दो राय नहीं कि सरकार ने एक तीर से कई निशाने लगाए हैं
  • आंदोलनकारी पहलवानों को नौकरी का भय दिखाकर मुख्य धारा से जोड़ा गया है
  • सूत्रों से पता चला है कि बजरंग पूनिया को दिल्ली सरकार में उसकी मनचाही पोस्ट मिलने वाली है
  • उत्तर रेलवे में कार्यरत उनकी पत्नी संगीता को भी संभवतया लाभान्वित किया जाएगा
  • उत्तर रेलवे के खेल विभाग में ओएसडी के पद पर कार्यरत ओलम्पिक पदक विजेता साक्षी मलिक और विनेश फोगाट को उनके पसंदीदा पद पर अतिरिक्त अधिकार दे दिए गए हैं
  • यौन शोषण के आरोपों से घिरे कुश्ती फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बचा लिया गया है

राजेंद्र सजवान

भारतीय खेल इतिहास के सबसे बड़े और शर्मनाक आंदोलन की तपिश लगभग ठंडी पड़ चुकी है। आंदोलनकारी पहलवान हालांकि गृहमंत्री अमितशाह से मिलने और ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद भी फिर से सड़क पर उतरने के लिए हुंकार भर रहे थे लेकिन उन्हें शायद जल्दी यह बात समझ आ गई है कि ऐसा करने से उनके ऊपर भी मामला बन सकता है और नौकरी भी जा सकती है। सूत्रों की मानें तो रेल विभाग में कार्यरत पहलवानों बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और संगीता फोगाट ने अब अपने-अपने विभाग का काम संभाल लिया है।

 

  इसमें दो राय नहीं कि सरकार ने एक तीर से कई निशाने लगाए हैं। पहला यह कि महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों से घिरे कुश्ती फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को साफ-साफ बचा लिया गया है। दूसरे, पहलवानों को नौकरी का भय दिखाकर मुख्य धारा से जोड़ा गया है। सूत्रों से पता चला है कि बजरंग पूनिया को दिल्ली सरकार में उसकी मनचाही पोस्ट मिलने वाली है। बजरंग डेपुटेशन पर दिल्ली सरकार में जाना चाहता था, उसकी फाइल दौड़ पड़ी है।

उनकी पत्नी संगीता उत्तर रेलवे में कार्यरत हैं। संभवतया संगीता को भी लाभान्वित किया जाएगा। ओलम्पिक पदक विजेता साक्षी मलिक और विनेश फोगाट उत्तर रेलवे के खेल विभाग में ओएसडी के पद पर कार्यरत हैं। सूत्र बताते हैं कि दोनों ही चैम्पियन पहलवानों को उनके पसंदीदा पद पर अतिरिक्त अधिकार दे दिए गए हैं।

 

  लेकिन आंदोलनकारी पहलवानों की तरक्की से जिन खेल कर्मियों और अधिकारियों पर असर पड़ा है उसकी भरपाई कौन और कैसे करेगा? जाहिर है इस उठा-पटक के बाद रेल विभाग में कुछ बदलाव भी होंगे, कुछ जमे जमाए और बेहतर काम करने वाले पूर्व खिलाड़ियों को बेवजह सजा देना कहां तक सही है इसका जवाब रेलवे को देना होगा।

कुछ खिलाड़ी तो अभी से कहने लगे हैं कि सरकारी नौकरी के सेवा नियमों से खिलवाड़ करने वालों को दबाव में लाभान्वित किया जाना सरासर गलत ही नहीं नियम विरुद्ध भी है। उल्लेखनीय है एक पूर्व ओलम्पियन ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि नियम विरुद्ध जाकर और सरकार पर दबाव बनाकर लाभ कमाने का यह असंवैधानिक फार्मूला सरासर गलत है।

 

  उल्लेखनीय है की भारतीय रेलवे देश के चैम्पियन खिलाड़ियों की शरण स्थली मानी जाती है। रेल विभाग में सभी खेलों के बड़े- छोटे खिलाड़ियों को रोजगार मिलता है लेकिन आज जैसी स्थिति का सामना शायद ही कभी करना पड़ा होगा। असंतुष्ट विभाग पर ऊपर से दबाव बता रहे हैं।

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