…लो हम नशाखोरी में खेल महाशक्ति बन गए!
- दुनिया के सबसे बड़े नशाखोर (डोपिंग करने वाले) देशों की फेरिस्त में भारत सबसे अव्वल बन गया है
- इस कड़ी में फ्रांस, रूस, जर्मनी और चीन क्रमश: दूसरे से पांचवें नंबर पर आते हैं
- शर्मनाक बात यह है कि भारत के सर्वाधिक 260 खिलाड़ी डोप (सात हजार सैंपल में से) की चपेट में है
- वहीं, खेल महाशक्ति चीन के लगभग 2400 खिलाड़ियों के सैंपल लिए गए, जिनमें से 43 पकड़ में आए हैं
राजेंद्र सजवान
हाल ही में वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के अध्यक्ष विटोल्ड बांका भारत आए और उन्होंने देश के खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की। उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य कदापि यह जानने का नहीं था कि भारत कैसे खेल महाशक्ति बनने जा रहा है। आखिर उसे कौन सी जादू की छड़ी मिल गई है? इसलिए भी नहीं आए, थे कि भारत ने कोई बड़ा तीन चलाया हो या किसी खिलाड़ी, खेल प्रशासक या कोच को नोबेल पुरस्कार मिलने जा रहा हो। सच्चाई यह है कि बांका भारत महान के खेल आकाओं को यह समझाने आए थे कि सुधर जाओ, नशाखोरी (डोपिंग) से बचो और देश को बदनाम ना करो।

हालांकि खेल मंत्रालय और देश के खेल आका कह रहे हैं कि वार्ता सौहार्दपूर्ण रही। यदि सचमुच ऐसा था तो उन्होंने सीबीआई के निदेशक मनोज शशिधर से मुलाकात क्यों की? इसलिए, क्योंकि 150 करोड़ की आबादी वाला अपना जगत गुरु भारत खेल जगत में सबसे बड़े नशाखोर देश के रूप में बदनाम हुआ है। सिर्फ बदनाम नहीं, दुनिया के सबसे बड़े नशाखोर (डोपिंग करने वाले) देश का तमगा भारत के सीने पर जड़ दिया गया है। इस कड़ी में फ्रांस, रूस, जर्मनी और चीन क्रमश: दूसरे से पांचवें नंबर पर आते हैं। शर्मनाक बात यह है कि भारत के सर्वाधिक 260 खिलाड़ी डोप की चपेट में है। यह संख्या अन्य दोषियों (देशों) के मुकाबले दोगुनी, चौगुनी और दस गुना से भी अधिक है। खेल महाशक्ति चीन के लगभग 2400 खिलाड़ियों के सैंपल लिए गए, जिनमें से 43 पकड़ में आए हैं जबकि भारत के सात हजार सैंपल में 260 खिलाड़ी डोपिंग करते पकड़े गए।

यह अंतर बताता है कि हमारा खेल तंत्र किस कदर बर्बाद और बदनाम हो रहा है। यह हाल तब है, जबकि हम 2030 के कॉमनवेल्थ और 2032 के ओलम्पिक की मेजबानी का दम भर रहे हैं। एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, मुक्केबाजी, पावरलिफ्टिंग और कबड्डी जैसे दमखम वाले खेलों में आधिकाधिक भारतीय खिलाड़ी डोप की चपेट में आए हैं जिनमें अनेक ओलम्पियन और अंतरराष्ट्रीय नाम भी शामिल है। यह हाल तब है जबकि बहुत कम भारतीय खिलाड़ी वाडा, नाडा की जांच में आते हैं। इसलिए क्योंकि फिसड्डियों का बचाव हो जाता है। यह ना भूले कि जनसंख्या के लिहाज से हम खेल जगत के सबसे नाकाम राष्ट्र है लेकिन डोप में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन का दम रखते हैं। ऐसा क्यों? देश के खेल आका चुप क्यों हैं?

