क्रूर सिस्टम से जीत पाएगी विनेश!
राजेंद्र सजवान
क्या विनेश फोगाट अपने ही बुने जाल में फंस गई है या दमदार प्रतिद्वंद्वी ने उसे पलटवार कर चारों खाने चित्त कर दिया है? ये सवाल भारतीय कुश्ती में ही नहीं, देश के राजनीतिक गलियारों और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन गया है। गोंडा में आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग सीरीज में भाग लेने का ऐलान करने के बाद उसे फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया गया है। इसलिए क्योंकि आयोजन स्थल पूर्व फेडरेशन अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण का गृह नगर है। उल्लेखनीय है कि विनेश फोगाट ने बृजभूषण पर शारीरिक शोषण के आरोप लगाए हैं। उसके साथ पांच अन्य लड़कियों ने भी पूर्व अध्यक्ष को कटघरे में खड़ा किया है, जिसकी जांच चल रही है। लेकिन तारीफ की बात यह है कि यह लड़ाई विनेश और बृजभूषण के बीच सिमटकर रह गई है। बाकी महिला पहलवान सीन से एकदम गायब हैं। हालांकि ओलम्पिक पदक विजेता साक्षी मलिक विनेश के साथ तन कर खड़ी है। ऐसे में यहां तक कहा जाने लगा है कि आरोप बेबुनियाद हैं।

फिलहाल विनेश के आरोप अदालतों की फाइलों में दफन है। जाहिर है, मामला लंबा चलेगा और फैसला क्या होगा हर कुश्ती प्रेमी और आम नागरिक जानता है। लेकिन सवाल पैदा होता है कि विनेश का लक्ष्य क्या है? क्या वह आज भी उतनी ही फिट है, जितनी पेरिस ओलम्पिक में थी? क्या उसने आज भी देश के लिए पदक जीतने की आग बरकरार है या यूं ही कुश्ती फेडरेशन और बृजभूषण से टकराने का मन है? कम से कम रिटायरमेंट के साल भर बाद वापसी का इरादा तो यही कहता है। या 2028 लॉस एंजेल्स ओलम्पिक में पदक जीतकर अपने सपने को पूरा करना चाहती है! लेकिन एक बड़ा वर्ग मानता है कि उसका पीक समय निकल गया है और आगे उसके सामने चयन, फॉर्म और फिटनेस के साथ-साथ क्रूर सिस्टम से लड़ने जैसी चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। खासकर, सिस्टम से लड़ना आसान नहीं होगा। यह न भूलें कि वह ऐसे सिस्टम से जूझ रही है, जिसने सौ ग्राम वजन बढ़वा कर उसका निश्चित स्वर्ण छीन लिया था!
फिलहाल कुश्ती का यह अनोखा दंगल दो धड़ों में बंट गया है। एक धड़ा कह रहा है, तुम लड़ो विनेश, हम तुम्हारे साथ हौ तो दूसरा उसकी लड़ाई का मज़ाक उड़ा रहा है।

