डीएसए में घमासान के बीच अनुज गप्ता बोले, चलो मिलकर चलते हैं
- अध्यक्ष अनुज गुप्ता की अगुआई में एआईएफएफ के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार नया संविधान अपनाने और 6 सितंबर को चुनाव कराने की घोषणा की है
- वहीं डीएसए के दूसरा धड़ा (बीएस मेहरा का गुट) पहले ही 30 अगस्त को चुनाव कराने का बिगुल बजा चुका है
- दोनों गुटों के अपने-अपने दावे हैं और अब देखना यह होगा कि किस गुट को एआईएफएफ का आशीर्वाद मिलता है
राजेंद्र सजवान
दिल्ली सॉकर एसोसिएशन (डीएसए) ने आज यहां विशेष आम सभा में अपने अध्यक्ष अनुज गुप्ता की अगुआई में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार नया संविधान अपनाने और 6 सितंबर को चुनाव कराने की घोषणा की है हालांकि एसोसिएशन का एक धड़ा पहले ही 30 अगस्त को चुनाव कराने का बिगुल बजा चुका है। दोनों गुट के अपने-अपने दावे हैं। अब देखना यह होगा कि अनुज गुप्ता और बीएस मेहरा गुटों में किसे एआईएफएफ का आशीर्वाद मिलता है। फिलहाल, इतना तय है कि दिल्ली की फुटबॉल में गुटबाजी का पुराना दौर शुरू हो गया है। ठीक वैसे ही जैसे पांच दशक पहले दिल्ली की फुटबॉल शर्मनाक गुटबाजी का शिकार हुई थी।

एक तरफ मेहरा के साथ डीएसए के कोषाध्यक्ष लियाकत अली को सुशांत देव, वेटरन मगन सिंह पटवाल, हेमचंद और अन्य का समर्थन और मार्गदर्शन प्राप्त है तो उपाध्यक्ष शराफत उल्लाह और स्क्वाड्रन लीडर एस.के. सिंह दूसरे धड़े को खुलकर समर्थन दे रहे हैं। इसमें दो राय नहीं कि मेहरा गुट का आकार काफी बड़ा है, जबकि अनुज गुप्ता के समर्थन में वहीं जाने पहचाने चेहरे नजर आते हैं, जो कि हमेशा से उनकी दरियादिली में भागीदार रहे हैं। अर्थात ऐसे पदाधिकारी और क्लब प्रमुख जो कि टीमों की चयन प्रक्रिया और आने-जाने, खाने-पीने में हिस्सेदारी पाते रहे हैं या यूं भी कह सकते हैं कि अनुज की दरियादिली का लाभ उठाते रहे हैं। वही अध्यक्ष एक बार फिर से चार साल मांग रहा है, जो कि एआईएफएफ के दिशा-निर्देशों पर निर्भर है।

अनुज ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि सभी लीग मुकाबलों का आयोजन बड़ी चुनौती थी। साथ ही सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर वर्गों की टीमों पर लाखों खर्च किया गया, जिसके शानदार रिजल्ट सामने आए। प्रशंसनीय बात यह रही है कि अनुज ने विपक्षी धड़े पर कोई गंभीर टीका-टिप्पणी नहीं की, बल्कि उन्हें साथ चलने और दिल्ली की फुटबॉल को आगे बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। हां, कोषाध्यक्ष लियाकत अली द्वारा डीएसए के बैंक खातों को ‘फ्रीज’ करने को गलत कदम जरूर बताया और कहा कि ऐसा करने से डीएसए की गतिविधियां और दिन प्रति दिन के खर्चों पर रोक लगानी पड़ी है।

अनुज गुप्ता ने उन आरोपों को निराधार बताया, जिनमें डीएसए के खजाने का दुरुपयोग शामिल है। उलटे अनुज कहते हैं कि दिल्ली की फुटबॉल गतिविधियों को जारी रखने के लिए उन्होंने अपनी सुदेवा अकादमी के ग्राउंड दिए, ‘फ्री ऑफ कॉस्ट’। उधर, दूसरी तरफ दावेदारी मज़बूत नज़र आती हैं लेकिन डीएसए के चरित्र पर विश्वास करना आत्मघाती होगा क्योंकि यहां जयचंद और दलबदलू कदम-कदम पर मिलेंगे।
